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नाइजर में तख्तापलट के दो दिन बाद सैन्य गटो में सत्ता की लड़ाई

नाइजर में सेना के विभिन्न गुट शुक्रवार को सत्ता के लिए संघर्षरत दिखे। एक विश्लेषक और एक पश्चिमी सैन्य अधिकारी ने राष्ट्रपति गार्ड की ओर से तख्तापलट किये जाने के दो दिन बाद यह जानकारी दी। इस तख्तापलट के कारण देश में राजनीतिक अराजकता फैल गई है जिससे जिहादियों के खिलाफ देश की लड़ाई में बाधा आ सकती है और पश्चिम अफ्रीका में रूस का प्रभाव बढ़ सकता है। यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि कौन प्रभारी नेता है और मध्यस्थता के लिए प्रयास शुरू किया गया है या नहीं। पड़ोसी देश नाइजीरिया का एक प्रतिनिधिमंडल आने के तुरंत बाद ही लौट गया और एक क्षेत्रीय निकाय की ओर से मध्यस्थ नामित किये गये बेनिन के राष्ट्रपति नहीं पहुंचे।

एक वार्ता के दौरान प्रतिभागियों से बातचीत में एक विश्लेषक ने कहा कि तख्तापलट करने वाले राष्ट्रपति गार्ड के सदस्य सेना के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं कि किसे प्रभारी नेता होना चाहिए। विश्लेषक ने हालात की संवेदनशीलता के मद्देनजर अपना नाम नहीं उजागर करने के लिए कहा। एक पश्चिमी सैन्य अधिकारी, जिन्हें मीडिया में बोलने का अधिकार नहीं है, ने पुष्टि की कि कि विभिन्न सैन्य गुट वार्ता कर रहे हैं, ऐसा माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पापुआ न्यू गिनी में बातचीत के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तख्तापलट की निंदा करते हुए इसे ‘‘पूर्ण रूप से अवैध और नाइजीरियाई लोगों के लिए बहुत खतरनाक’ करार दिया।

मैक्रों ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति बजौम से कई बार बातचीत की और कैद में बंद नेता का स्वास्थ्य ठीक है। फ्रांस ने 1960 तक नाइजर पर एक उपनिवेश के रूप में शासन किया था। इस देश में फ्रांस के 1,500 सैनिक हैं, जो नाइजीरियाई लोगों के साथ संयुक्त अभियान चलाते हैं। बृहस्पतिवार को कई सौ लोग राजधानी नियामी में एकत्र हुए और रूसी झंडे लहराते हुए रूसी निजी सैन्य समूह वैगनर के समर्थन में नारे लगाए। इसके बाद उन्होंने कारों को जला दिया और राष्ट्रपति के राजनीतिक दल के मुख्यालय में तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों में से एक उमर इस्साका ने कहा, ‘‘हम तंग आ चुके हैं। ’’ उमर ने फ्रांसीसी मुर्दाबाद का नारा लगाते हुए कहा, ‘‘हम रूस के साथ सहयोग करने जा रहे हैं।’’ विद्रोही सैनिकों ने किसी नेता की घोषणा नहीं की है और राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम ने इस्तीफा नहीं दिया है।

1960 में फ्रांस से आजादी के बाद नाइजर में हुए पहले लोकतांत्रिक सत्ता हस्तांतरण के तहत दो साल पहले बजौम राष्ट्रपति चुने गए थे। पड़ोसी देश माली और बुर्किना फासो, दोनों ने फ्रांसीसी सेना को बाहर कर दिया है, जो पहले जिहादियों के खिलाफ उनकी लड़ाई में सहायता प्रदान करती थी। माली ने भी वैगनर से संपर्क किया है और माना जा रहा है कि उसके लड़ाके जल्द ही बुर्कीना फासो में मौजूद होंगे। अब चिंता जताई जा रही है कि कहीं नाइजर भी उनकी राह पर ना चल पड़े।

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