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दो बम और एक सैटेलाइट…वो चीनी साइंटिस्ट जिसे मिला फ्रांस का टॉप साइंस अवॉर्ड

चीन की गिनती आज स्पेस और न्यूक्लियर पावर के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में होती है. चीन की इस सफलता के पीछे एक वैज्ञानिक को खासतौर पर श्रेय दिया जाता है. यह एक ऐसा वैज्ञानिक था जिसे सिर्फ चीन ही नहीं बल्कि फ्रांस की सरकार ने भी सम्मानित किया. यह थे चीन के वैज्ञानकि कियान सानकियांग (Qian Sanqiang). कियान को अक्सर चीनी परमाणु कार्यक्रम का जनक कहा जाता है. हृदय की बीमारी की वजह से 1992 में कियान सानकियांग का निधन हो गया.

कियान सानकियांग का जन्म 1913 में चीन के झेजियांग प्रांत में हुआ था. विद्वान पिता के अनुरूप कियान भी बचपन से पढ़ाई में काफी अच्छे थे. साल 1932 में, चीन में पहला नेशनल काॅलेज एंट्रेंस एग्जाम हुआ. उस साल सिंगुआ यूनिवर्सिटी (Tsinghua University) में पूरे देश से सिर्फ 50 बच्चों का चयन हुआ जिनमें से एक कियान सानकियांग थे. सिंगुआ यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन के बाद उनको आगे की पढ़ाई के लिए फ्रांस भेजने की सिफारिश की गई.

फ्रांस में मिला साइंस का टॉप अवॉर्ड
कियान सानकियांग ने फ्रांस में 11 साल रहे थे. उस समय उन्होंने न्यूकलियर एटोमिक एनर्जी पर गहरी स्टडी की थी. यहां की हुई पढ़ाई उन्हें भविष्य में चीन के न्यूकलियर बम परक्षिण में काम आई. कियान सानकियांग को इस बीच हुई फ्रांस महत्वपूर्ण खोजों का श्रेय दिया जाता है. 1946 में फ्रेंच एकेडमी ऑफ साइंसेज ने सानकियांग को फिजिक्स के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए हेनरी डी पारविले (Henri de Parville Award) पुरस्कार से सम्मानित किया था.

फ्रांस में मिल रही बेहतर जिंदगी को छोड़कर कियान ने वापस चीन आना सही समझा. बताया जाता है कि मातृभूमि के लिए उनका प्यार कियान के लिए कई वैज्ञानिक ऊंचाइयों को जीतने की प्रेरणा बना था. उन्होंने कम्युनिस्टों की ‘देश के निर्माण’ में मदद करने का संकल्प लिया. इस सोच के साथ विदेश में एक दशक बिताने के बाद साल 1948 में कियान अपने मातृभूमि यानी चीन पहुंचे. यहां उनका खुले दिल से स्वागत हुआ.

चीन आने के एक साल बाद ही चीन के हालातों में बड़ा बदलाव आया. दरअसल, 1 अक्टूबर, 1949 को चीनी कम्युनिस्ट नेता माओ ज़ेदोंग ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के निर्माण की घोषणा की. इस घोषणा ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और नेशनलिस्ट पार्टी के बीच का युद्ध खत्म किया, जो दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद से चला आ रहा था.

नई कम्युनिस्ट सरकार को कियान सानकियांग की योग्यता पर भरोसा था. सानकियांग को सिंगुआ यूनिवर्सिटी में फिजिक्स डिपार्टमेंट का प्रोफेसर बना दिया गया. इसके अलावा वो एटोमिक एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट के महानिदेशक बने. सरकार ने उन्हें यूरोप से परमाणु उपकरण खरीदने के लिए वित्तीय सहायता की पेशकश भी की थी. कियान की लीडरशिप में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने स्थापना के कुछ सालों के भीतर ही अपना पहला हेवी वाॅटर न्यूकलियर रिएक्टर बना लिया था.

दो बम और एक सैटेलाइट…
1955 में माओ ज़ेदोंग ने चीन का पहला परमाणु बम विकसित करने का इरादा व्यक्त किया. तब तक कियान सानकियांग क्मयूनिस्ट पार्टी का हिस्सा बन चुके थे. परमाणु बम बनाने के प्रोजेक्ट के लिए कम्युनिस्ट पार्टी ने कियान को प्रशासनिक प्रमुख नियुक्त किया. इसका नतीजा यह हुआ कि चीन कुछ सालों में दुनिया का पांचवा परमाणु बम संपन्न देश बन गया. 16 अक्टूबर, 1964 को चीन ने घोषणा की कि उसने अपना पहला परमाणु बम सफलतापूर्वक विस्फोट कर दिया है. इसके कुछ सालों बाद ही 1967 में चीन ने अपना पहला हाइड्रोजम बम विस्फोट करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक कायम की.

परमाणु बम के अलावा कियान सानकियांग का चीन की पहली सैटेलाइट विकसित करने में भी अहम योगदान रहा. 1970 में चीन ने अपनी पहली सैटेलाइट Dong Fang Hong 1 को लाॅन्च किया.

इससे सोवियत संघ, अमेरिका, फ्रांस और जापान के बाद चीन खुद के बनाए राॅकेट से अंतरिक्ष यान को कक्षा में स्थापित करने वाला पांचवां देश बन गया.कियान का चीन के परमाणु और हाइड्रोजन बम में अहम योगदान रहा है. इस वजह से उन्हें ‘चीन के परमाणु बम के जनक’ के रूप में जाना जाता है. सितंबर 1999 में, उनकी मौत के सात साल बाद, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने कियान को ‘दो बम और एक सैटेलाइट’ विशेष पुरस्कार दिया था. कियान के फिजिक्स के क्षेत्र में योगदान के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने 1985 में उन्हें सैन्य सम्मान से सम्मानित किया.

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