Author: Johardesh

  • व्यापारी पर गोली चलाने वाला आरोपी को हथियार सहित गिरफ्तार

    व्यापारी पर गोली चलाने वाला आरोपी को हथियार सहित गिरफ्तार

    मुरैना। सिटी कोतवाली पुलिस ने विगत दिनों कृषि उपज मंडी में व्यापारी के ऊपर फायरिंग करने वाले एक आरोपी को हथियार सहित गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।
    फरियादी मुकेश गुर्जर पुत्र स्व. रामेश्वर गुर्जर निवासी नैनागढ रोड पर 11 जुलाई को दिनदहाड़े अनाज बेचने आए किसान ने भाव कम बोलने पर भुगतान कर रहे व्यापारी को मारने के उद्देश्य से तीन फायर कट्टे से किए, जिसमें व्यापारी तो बाल-बाल बच गया, लेकिन एक किसान को कट्टे का छर्रा लगा। इस घटना से कृषि मंडी में दहशत फैल गई तथा दूसरे दिन व्यापारियों ने हड़ताल कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह चौहान के निर्देश पर सिटी कोतवाली पुलिस ने सोमवार को मामले का पटाक्षेप कर दिया। थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह ने पुलिस टीम के साथ मुखबिर की सूचना पर से आरोपी निवासी भानपुर थाना सरायछोला हाल बिस्मिलनगर मुरैना को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त 315 बोर का कट्टा जप्त किया गया है। आरोपी के व्दारा पूर्व में भी राजस्थान मे लूट व पुलिस बल पर हमला किया था, जिसका आपराधिक रिकार्ड सम्बधित थाने से मंगाया गया है।

  • नाम-कमेटी और अध्यक्ष- विपक्षी डिनर पर इन मसलों पर बात

    नाम-कमेटी और अध्यक्ष- विपक्षी डिनर पर इन मसलों पर बात

    लोकसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी के विजयी रथ को रोकने के लिए विपक्ष मंथन कर रहा है. बेंगलुरु में सोमवार से संयुक्त विपक्ष की बैठक की शुरुआत एक इन्फॉर्मल डिनर के साथ हुई, अब मंगलवार को आगे की रणनीति को तैयार किया जाएगा. विपक्षी नेताओं के डिनर के दौरान भी कई मसलों पर बात हुई है, जिनमें कमेटी के गठन से लेकर गठबंधन के नाम और बड़ी रैली को लेकर चर्चा हुई है.

    डिनर में किन मसलों पर बनी बात?
    सूत्रों के मुताबिक, साझा रणनीति, चुनाव प्रचार और सीटों के समझौते पर सब-कमेटी बनाने पर विचार किया गया है. हालांकि, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसपर सुझाव देते हुए कहा कि इसे सब कमेटी नहीं बल्कि ज्वाइंट कमेटी कहा जाए, जिसपर नीतीश कुमार ने चुटकी भी ली.

    बिहार सीएम ने कहा कि ममता जी फॉर्म में आ गई हैं, पिछली बार भी उन्होंने कहा था कि हमें विपक्ष ही ना कहा जाए. कमेटी के गठन के अलावा इस बैठक में विपक्षी गठबंधन के नाम, संयोजक और अध्यक्ष पद के नाम पर भी फैसला हो सकता है. हालांकि, सीटों के बंटवारे का मसला अभी तक आगे नहीं बढ़ा है. संयुक्त विपक्ष की जल्द ही एक बड़ी रैली भी आयोजित की जा सकती है.

    जानकारी के मुताबिक, विपक्षी एकता के इस गठबंधन को क्या नाम दिए जाए इसको लेकर कुछ सुझाव भी सामने आए हैं. एक वरिष्ठ नेता ने इसे इंडियन पैट्रोएटिक अलायंस कहा है, जबकि किसी ने फ्रंट कहे जाने की बात कही है. हालांकि, यहां भी ममता बनर्जी ने सुझाव दिया है और कहा है कि नाम कुछ भी रखें, लेकिन उसमें फ्रंट शब्द का प्रयोग ना करें.

    24 की लड़ाई के लिए NDA बनाम UPA

    आपको बता दें कि 2014, 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद विपक्ष अब 2024 में एकजुट होना चाह रहा है. 23 जून को पहले पटना में नीतीश कुमार की अगुवाई में बैठक हुई, जिसमें करीब 15 दलों ने हिस्सा लिया. अब बेंगलुरु में 17-18 जुलाई को कांग्रेस की अगुवाई में मीटिंग हो रही है और यहां करीब 26 दल साथ आए हैं.

    बेंगलुरु में सोमवार को डिनर का आयोजन किया गया, यहां सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला, अखिलेश यादव समेत अन्य कई विपक्षी नेता मौजूद रहे. मंगलवार को होने वाली बैठक में एनसीपी प्रमुख शरद पवार, सुप्रिया सुले और अन्य बड़े विपक्षी नेता भी शामिल होंगे.

    इधर बेंगलुरु में विपक्ष की साझा बैठक हो रही है, जबकि दिल्ली में सत्ता पक्ष भी जुट रहा है. बीजेपी ने एनडीए की बैठक बुलाई है जो दिल्ली के अशोका होटल में होनी है, इसमें करीब 38 दलों के शामिल होने की संभावना है. जेपी नड्डा के बुलावे पर कई नए दल भी एनडीए के साथ जुड़े हैं, जिनमें चिराग पासवान, जीतनराम मांझी, ओमप्रकाश राजभर जैसे नाम भी शामिल हैं.

  • Delhi Ordinance Case: संविधान पीठ के पास भेजा जा सकता है अध्यादेश का मामला

    Delhi Ordinance Case: संविधान पीठ के पास भेजा जा सकता है अध्यादेश का मामला

    केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच तनातनी एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में है. दिल्ली में केंद्र सरकार की ओर से लाए अध्यादेश पर सुप्रीम कोर्ट इस हफ्ते गुरुवार को होने वाली सुनवाई में यह तय करेगा कि इस अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली सरकार की याचिका को संविधान पीठ के समक्ष भेजा जाए या नहीं. हालांकि सुनवाई के दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ ने मामले को संविधान पीठ के समक्ष भेजने का संकेत दिए हैं. साथ ही कोर्ट ने एक अन्य मामले में कहा कि डीईआरसी के अध्यक्ष पद को लेकर एलजी और सीएम को मिलकर एक नाम तय करना चाहिए.

    सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मुद्दा यह है कि संसद के पास सूची 2 या सूची 3 में किसी भी प्रविष्टि के तहत कानून बनाने की शक्ति है या नहीं. आपने अध्यादेश के इस खंड 3 के जरिए यह कहा है कि राज्य के पास विधायिका प्रविष्टि 41 के तहत बिल्कुल भी कानून बनाने का अधिकार नहीं है.

    अध्यादेश लाने की जरुरत क्यों पड़ी
    सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से हलफनामा दाखिल में जानकारी दी गई कि आखिर उसे अध्यादेश लाने की जरूरत क्यों पड़ी? केंद्र ने कहा कि दिल्ली के मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर आदेश अपलोड किए, जिसके बाद अधिकारियों की तलाश शुरू हो गई.

    केंद्र की ओर से कहा गया कि आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार ने सतर्कता अधिकारियों को निशाना बनाया और रात 11 बजे के बाद फाइलों पर कब्जा करने के लिए सतर्कता अधिकारियों तक पहुंच बना ली.

    संविधान पीठ के पास भेजे जाने पर होगा फैसला
    सीजेआई ने कहा कि 3 प्रविष्टियां हैं, जिन पर दिल्ली सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है. उन्होंने जो किया है वह यह है कि 239 AA (vii) के तहत शक्ति का इस्तेमाल करके, उन्होंने सेवाओं को दिल्ली सरकार के नियंत्रण से बाहर करने के लिए संविधान में संशोधन किया है. क्या यह अनुमति योग्य है? मुझे नहीं लगता कि किसी भी फैसले ने इसे कवर किया है. हम इस मसले को संविधान पीठ के समक्ष भेजना चाहते हैं. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई गुरुवार को करेगा.

    वहीं केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच पावर को लेकर तनातनी फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. दिल्ली सरकार की ओर से DERC के अध्यक्ष पद पर पूर्व जज जस्टिस उमेश कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल को बैठकर नियुक्ति करनी चाहिए.

    हर मसले पर SC आना जरुरी नहींः CJI चंद्रचूड़
    सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या एलजी और सीएम केजरीवाल मिलकर डीईआरसी के अध्यक्ष पद के लिए एक सहमत नाम दे सकते हैं और हम उसे फिलहाल नियुक्त कर सकते हैं. हर मसले के लिए सुप्रीम कोर्ट आना जरूरी नहीं है.
    वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट से कहा कि मुझे निर्देशों की आवश्यकता नहीं है. मैं दिल्ली एलजी की ओर से पेश हुआ हूं. दिल्ली सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह चमत्कार ही होगा कि अगर दोनों एक नाम पर राजी हो जाएं.
    इस पर सीजेआई ने कहा कि दोनों संवैधानिक पदाधिकारियों को राजनीतिक कलह से ऊपर उठना चाहिए और उन्हें डीईआरसी के अध्यक्ष के लिए मिलकर एक नाम सुझाना चाहिए.

    हालांकि एलजी की ओर से कोर्ट में पेश साल्वे ने कहा कि जब दिल्ली सरकार के वकील कहते हैं कि उन्हें मामले में कोई उम्मीद नहीं है, जबकि उनकी पहली प्रतिक्रिया यह होनी चाहिए कि हां यह किया जा सकता है. सीजेआई ने फिर कहा कि मेरे पास कई नाम हैं, जो इस पद को स्वीकार करने के इच्छुक होंगे. सिंघवी ने कहा कि हम कल मंगलवार को दिल्ली एलजी से संपर्क करेंगे.सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर नोटिस जारी किया और संविधान पीठ के समक्ष मामला भेजने को कहा. डीईआरसी अध्यक्ष पद के मामले पर भी कोर्ट में गुरुवार को ही सुनवाई होगी.

  • बड़ी राहत! बस कुछ दिन में वापस आएगा ‘सहारा’ में फंसा पैसा

    बड़ी राहत! बस कुछ दिन में वापस आएगा ‘सहारा’ में फंसा पैसा

    देश के करोड़ों लोगों का फैसा ‘सहारा ग्रुप’ की इंवेस्टमेंट पॉलिसीज और बांड में फंसा है. ऐसे लोगों के लिए देश के गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह कल यानी 18 जुलाई को बड़ा ऐलान करने जा रहे हैं. उनके इस ऐलान से लोगों को सहारा में फंसा पैसा निकालने में बेहद आसानी होगी और उनका काम घर बैठे हो जाएगा.

    दरअसल अमित शाह मंगलवार को ‘सहारा रिफंड पोर्टल’ शुरू करने जा रहे हैं, जो सुबह 11 बजे से लाइव हो जाएगा. गृह मंत्री अटल ऊर्जा भवन में इस पोर्टल की शुरुआत करेंगे. इस पोर्टल के माध्यम से ऐसे लोगों को पैसा वापस मिलेगा जिनकी पॉलिसी या बांड की मैच्योरिटी पूरी हो गई है.
    सरकार ने सेबी से लिया पैसा

    सहारा इंडिया ग्रुप पर सेबी की कार्रवाई और उसके बाद अदालती केस के चलते लोगों का लंबे समय से पैसा फंसा हुआ है. हाल में सरकार ने पहल करते हुए इस पैसे का एक हिस्सा लोगों को वापस देने की योजना बनाई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को 5,000 करोड़ रुपये का फंड सहकारिता मंत्रालय को ट्रांसफर करने का आदेश दिया.
    10 करोड़ लोगों को राहत

    सरकार ने इसी साल 29 मार्च को कहा था कि वह सहारा ग्रुप की 4 को-ओपरेटिव्स के करीब 10 करोड़ जमाकर्ताओं को नौ महीने में पैसे लौटाने का काम करेगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सेबी ने पहले केंद्रीय सहकारी समिति रजिस्ट्रार (सीआरसीएस) को 5000 करोड़ ट्रांसफर किए. अब सरकार ने ये पोर्टल तैयार किया है. इस पोर्टल को बनाने का मकसद सहारा ग्रुप की 4 को-ओपरेटिव्स के जमाकर्ताओं को अपने वैध क्लेम जमा करने की सुविधा देना है.
    क्या आपका पैसा है इन को-ओपरेटिव्स में

    सरकार ने जिन 4 को-ओपरेटिव्स के लोगों को पैसा लौटाने की बात कही है, उनमें सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड शामिल हैं.

    आपको अगर देखना है कि आपका पैसा किस सहारा की किस को-ओपरेटिव में जमा है, तो उसके लिए आप अपने पास मौजूद सहारा के बांड या पॉलिसी को चेक करें. इस पर आपको सहारा की उस को-ओपरेटिव की जानकारी मिल जाएगी जिसमें आपका पैसा जमा है.