Category: शिवपुरी

  • होटल के कमरे में छात्रा की संदिग्ध मौत; दोस्त के साथ रुकी थी युवती, जांच में जुटी पुलिस

    होटल के कमरे में छात्रा की संदिग्ध मौत; दोस्त के साथ रुकी थी युवती, जांच में जुटी पुलिस

     

    – क्या ​यह आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और साजिश?

    – होटल के कमरे में ऐसा क्या हुआ कि युवती को जान गंवानी पड़ी?

    अजनबी न्यूज शिवपुरी। शहर के फिजिकल थाना क्षेत्र स्थित ‘युवराज होटल’ में बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक 20 वर्षीय कॉलेज छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। छात्रा अपने एक पुरुष मित्र के साथ होटल पहुंची थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की गुत्थी सुलझाना शुरू कर दिया है।

    क्या है पूरा मामला?

    ​मिली जानकारी के अनुसार, सेसई गांव की रहने वाली नैनसी राठौर (20) शिवपुरी के एक शासकीय कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। बुधवार सुबह करीब 11 बजे वह परिजनों से कॉलेज का फॉर्म भरने की बात कहकर घर से निकली थी। लेकिन कॉलेज जाने के बजाय वह गांव के ही एक युवक अंकुश के साथ युवराज होटल पहुंची, जहां दोनों ने एक कमरा किराए पर लिया।

    अस्पताल पहुंचने पर हुई मौत की पुष्टि

    ​बताया जा रहा है कि कमरे के भीतर दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई। कुछ देर बाद, अंकुश युवती को बेसुध हालत में निजी अस्पताल (एमएम हॉस्पिटल) लेकर पहुंचा। हालांकि, वहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद नैनसी को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रबंधन ने मामले की गंभीरता और संदिग्ध हालात को देखते हुए तुरंत पुलिस को सूचित किया।

    सवालों के घेरे में ‘आत्महत्या’ की थ्योरी

    ​शुरुआती जानकारी में फांसी लगाकर आत्महत्या की बात सामने आ रही है, लेकिन पुलिस इसे पूरी तरह सच नहीं मान रही है। घटना स्थल पर युवक की मौजूदगी और अचानक हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

    क्या यह आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और साजिश?

    होटल के कमरे में ऐसा क्या हुआ कि युवती को जान गंवानी पड़ी?

    विवाद की असली वजह क्या थी?

    ​”मृतिका के पिता ने बताया कि बेटी घर से फॉर्म भरने का कहकर निकली थी, बाद में उसकी मौत की खबर आई। जिस युवक के साथ वह थी, वह गांव का ही है और बाहर नौकरी करता है, जो हाल ही में गांव आया था।”

    ​फिजिकल थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने युवती के मित्र अंकुश को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट (PM Report) आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल होटल के सीसीटीवी फुटेज और कमरे की तलाशी ली जा रही है।

     

  • खूनी सनक: जिस हाथ ने थामी थी कलाई, उसी ने बरसाया हथौड़ा!

    खूनी सनक: जिस हाथ ने थामी थी कलाई, उसी ने बरसाया हथौड़ा!

     

    शिवपुरी के नरवर में बीच बाजार दहशत का तांडव; बचाने आई भाभी को भी नहीं बख्शा

       /// राहुल अष्ठाना अजनबी ///

    ​नरवर (शिवपुरी): एक साल से सूनी पड़ी मांग, आंखों में अपनी मासूम बेटी का भविष्य और दिल में पति की प्रताड़ना का डर… राजकुमारी ने सोचा भी नहीं था कि जिस रास्ते से वो अपनी लाड़ली को स्कूल लेने जा रही है, वहां उसकी जिंदगी का सबसे खौफनाक मंजर इंतज़ार कर रहा है।

    ​🔨 बीच सड़क पर ‘हथौड़ा मार’ पति का तांडव

    ​सोमवार की वो शाम नरवर के पुराने डाकघर इलाके के लिए आम नहीं थी। नारायणपुर की बेटी राजकुमारी (23) अपनी भाभी नीलम के साथ बेटी को लेने स्कूल जा रही थी। तभी अचानक पीछे से काल बनकर आया उसका पति रवि कुशवाह। इससे पहले कि राजकुमारी कुछ समझ पाती, रवि के हाथ में चमक रहे लोहे के भारी हथौड़े ने उसकी खोपड़ी पर जोरदार प्रहार किया।

    ​चीख-पुकार और खून के फव्वारों के बीच जब भाभी नीलम अपनी ननद को बचाने के लिए ढाल बनी, तो सनकी पति ने उस पर भी रहम नहीं किया। बीच बाजार हथौड़े चलते रहे और लोग मूकदर्शक बने तमाशा देखते रहे।

    ​🏠 मायके की दहलीज और टूटता रिश्ता

    ​राजकुमारी और रवि की शादी कुछ साल पहले बड़े अरमानों के साथ हुई थी, लेकिन जल्द ही यह रिश्ता ‘मारपीट’ और ‘क्लेश’ की भेंट चढ़ गया।

    ​एक साल का अलगाव: पति की हरकतों से तंग आकर राजकुमारी एक साल से मायके में अपनी बेटी के साथ रह रही थी।

    ​दबाव का खूनी अंजाम: आरोपी रवि लगातार उस पर लौटने का दबाव बना रहा था, लेकिन राजकुमारी को क्या पता था कि इनकार की कीमत उसे अपने खून से चुकानी पड़ेगी।

     

    ​🚔 पुलिस की तलाश और अस्पताल में जंग

    ​वारदात को अंजाम देकर दरिंदा पति तो फरार हो गया, लेकिन पीछे छोड़ गया लहूलुहान सड़कों पर दर्द की दास्तां। दोनों घायल महिलाओं को गंभीर हालत में ग्वालियर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जहां उनकी जिंदगी और मौत के बीच जंग जारी है।

    ​”यह सिर्फ एक हमला नहीं, एक मां की ममता और एक औरत के आत्मसम्मान पर वार है। पुलिस आरोपी को पाताल से भी ढूंढ निकालेगी।” — विनय यादव, थाना प्रभारी नरवर

  • ममता की मूरत बने CEO मोगराज मीणा: गौशाला निरीक्षण के दौरान नन्हे बछड़े को गोद में उठा जीता सबका दिल

    ममता की मूरत बने CEO मोगराज मीणा: गौशाला निरीक्षण के दौरान नन्हे बछड़े को गोद में उठा जीता सबका दिल

     “सच्ची सेवा वही है जो बेजुबानों के प्रति करुणा से भरी हो। गौमाता और उनके वंशज हमारी संस्कृति का आधार हैं, उनकी सेवा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है”

     

       //// राहुल अष्ठाना अजनबी ////

    अजनबी न्यूज शिवपुरी। अक्सर सरकारी अधिकारियों की छवि फाइलों और सख्त अनुशासन के इर्द-गिर्द सिमटी होती है, लेकिन जनपद पंचायत सीईओ मोगराज मीणा ने अपनी एक ऐसी तस्वीर पेश की है जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है। अपनी ईमानदार कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा के लिए पहचाने जाने वाले श्री मीणा जब गौशाला का निरीक्षण करने पहुंचे, तो वहां एक बेहद मार्मिक दृश्य देखने को मिला।

    निरीक्षण के बीच झलका ‘गौ-प्रेम’

    ​निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक बारीकियों को देखने के साथ-साथ मीणा जी की नजर एक छोटे से बछड़े पर पड़ी। बिना किसी हिचकिचाहट के, उन्होंने उस नन्हे जीव को अपनी गोद में उठा लिया। जिस आत्मीयता और दुलार के साथ उन्होंने बछड़े को पुचकारा, वह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान ले आया।

    क्यों खास है यह पहल?

    ​संवेदनशीलता का परिचय: यह दर्शाता है कि एक अधिकारी केवल कागज पर ही नहीं, बल्कि जमीन पर भी जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील है।

    ​प्रेरणादायक संदेश: सरकारी व्यवस्था में गौशालाओं की स्थिति को लेकर अक्सर चर्चा होती है, लेकिन सीईओ साहब का यह निजी जुड़ाव कर्मचारियों को भी पशुओं की बेहतर सेवा के लिए प्रेरित करता है।

    ​सादगी की मिसाल: बड़े पद पर होने के बावजूद एक मूक पशु के प्रति ऐसा निस्वार्थ प्रेम उनकी सादगी को बयां करता है।

     

     

  • विदाई सम्मान: “ईमानदारी, सरल व्यवहार की मिसाल बने अष्ठाना: ईई शुभम अग्रवाल 

    विदाई सम्मान: “ईमानदारी, सरल व्यवहार की मिसाल बने अष्ठाना: ईई शुभम अग्रवाल 

     

    विदाई समारोह में अष्ठाना बोले ​एक ऐसी पारी जिसका अंत भी शुरुआत जैसा चमकदार रहा… 

    अजनबी न्यूज शिवपुरी। ​कहते हैं कि इंसान का पद उसकी पहचान नहीं होता, बल्कि उसका व्यवहार और काम करने का तरीका उसकी असली पहचान बनाता है। विभाग में अपनी लंबी और शानदार सेवाओं के बाद जब श्री दिनेश कुमार अष्ठाना ने अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर विदाई भाषण दिया, तो उनकी बातों में अनुभव का सागर और ईमानदारी की चमक साफ दिखाई दी।

    ​”काम ही पूजा है”: अष्ठाना का मंत्र

    ​अपने विदाई भाषण के दौरान दिनेश अष्ठाना भावुक नजर आए, लेकिन उनके शब्द उतने ही स्पष्ट थे। उन्होंने अपनी सफलता और सुकून का राज साझा करते हुए कहा:

    ​”यदि आप अपने काम को पूरी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ निभाते हैं, तो जीवन में कभी कोई परेशानी आपके सामने टिक नहीं पाएगी। काम को बोझ नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी समझें।”

     

    सहकर्मियों की नजर में एक आदर्श व्यक्तित्व

    ​समारोह में मौजूद वरिष्ठ अधिकारी पीएचई विभाग के मुखिया ईई शुभम अग्रवाल ने दिनेश जी की तारीफों के पुल बांधे। अधिकारियों ने उनके कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि श्री अष्ठाना ने न केवल एक कर्मचारी के रूप में, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में अपनी भूमिका निभाई। इसी के साथ श्री अग्रवाल ने कहा कि

    ​ईमानदारी उनके पूरे करियर में पारदर्शिता उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। कार्यस्थल पर किसी भी चुनौती को स्वीकार करने के लिए वे हमेशा सबसे आगे खड़े रहे। उन्होंने कभी भी काम की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया।

    दिल को छू लेने वाला विदाई पल

    ​जब विदाई की घड़ी आई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। यह केवल एक कर्मचारी की विदाई नहीं थी, बल्कि एक ऐसे स्तंभ की विदाई थी जिसने विभाग को अपनी मेहनत से सींचा था। अधिकारियों ने फूलों के हार और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामनाओं के साथ पीएचई विभाग से एसडीओ श्रीवास्तव को भी सेवानिवृत्ति के मौके पर श्री अग्रवाल ने उन्हें शाॅल श्रीफल के साथ भगवान राम (आयोध्या) की प्रतिमा से सम्मानित कर कार से छोड़ने आए। इस दौरान श्री अष्ठाना के परिवार से उनकी मां श्री मति जलदेवी अस्थाना , धर्म पत्नी सीमा व उनके दामाद धर्मेंद्र सक्सेना भाई राजेश अस्थाना, राहुल अष्ठाना “अजनबी”  एवं अन्य परिजननों के साथ साथ समस्त स्टाफ  उपस्थित रहे।

     

  • नन्हीं तान्या के मासूम सवाल ने जीता SDOP का दिल: “अंकल, मुझे भी आपके जैसा पुलिस अफसर बनना है”

    नन्हीं तान्या के मासूम सवाल ने जीता SDOP का दिल: “अंकल, मुझे भी आपके जैसा पुलिस अफसर बनना है”

    अजनबी न्यूज ​शिवपुरी। कहते हैं कि बच्चों के मन में जो बैठ जाता है, वही उनके भविष्य की नींव बनता है। कुछ ऐसा ही भावुक और प्रेरणादायक नजारा तब देखने को मिला जब राहुल अष्ठाना पत्रकार की नन्हीं बेटी तान्या की मुलाकात SDOP संजय चतुर्वेदी से हुई। तब अपनी मासूम आवाज और आंखों में ढेर सारे सपने लिए तान्या ने जब वर्दी में सजे अधिकारी को देखा, तो वह अपनी उत्सुकता रोक नहीं पाई। उसने बड़ी ही मासूमियत के साथ एसडीओपी चतुर्वेदी से कहा “अंकल, मुझे भी आपकी तरह पुलिस बनना है।” इस दौरान एसडीओपी संजय चतुर्वेदी ने कहा कि ​”बच्चों की आंखों में देश की सेवा का सपना देखना सबसे सुखद अनुभव है। तान्या जैसी नन्हीं प्रतिभाएं ही कल का सुरक्षित भारत बनाएंगी।”

    मासूमियत और खाकी का अनूठा मेल

    ​आमतौर पर पुलिस की छवि सख्त मानी जाती है, लेकिन तान्या की इस मार्मिक इच्छा ने वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर मुस्कान ला दी। एसडीओपी संजय चतुर्वेदी ने भी किसी कड़क अफसर की तरह नहीं, बल्कि एक अभिभावक की तरह तान्या को दुलारा और उसका हौसला बढ़ाया।

    महत्वपूर्ण बातें…..

    ​प्रेरणा: छोटे बच्चों का पुलिस सेवा के प्रति यह आकर्षण समाज में खाकी के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

    ​मार्मिक पल: तान्या का अपनी तोतली आवाज में “अंकल” कहकर संबोधित करना और अपने भविष्य का सपना साझा करना बेहद भावुक कर देने वाला था।

    ​इसी के साथ राहुल अष्ठाना पत्रकार की बेटी के इस जज्बे को देखकर वहां उपस्थित सुभाषपुरा थाना प्रभारी एस आई राजीब दुबे ने कहा कि अगर बच्चों को सही दिशा और प्रोत्साहन मिले, तो वे देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।

     

     

     

     

  • श्रीमती राज श्री देवी जी का शोक संदेश एवं श्रद्धांजलि सभा सोमवार को

    श्रीमती राज श्री देवी जी का शोक संदेश एवं श्रद्धांजलि सभा सोमवार को

         // श्रद्धांजलि सभा //

    “मां, दादी, और मार्गदर्शक… श्रीमती राज श्री देवी जी (धर्मपत्नी श्री लज्जाराम सिंह तोमर) आप भले ही हमसे दूर चली गईं, लेकिन आपके दिए हुए संस्कार हमारे जीवन की हर राह को रोशन करते रहेंगे।”

    1. ​अत्यंत दुख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारी पूजनीय श्रीमती राज श्री देवी जी का स्वर्गवास हो गया है। उनके पुण्य स्मरण और आत्मा की शांति हेतु एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है।

    कार्यक्रम का विवरण:

    • दिनांक: सोमवार, 19 जनवरी 2026
    • स्थान: डॉ. सुनील तोमर का निवास, कोठी नंबर 6, फिजिकल रोड, शिवपुरी (म.प्र.)

    शोकाकुल परिवार:

    • पति: श्री लज्जाराम सिंह तोमर
    • पुत्र: श्री राकेश सिंह तोमर
    • नाती: डॉ. सुनील तोमर, डॉ. रवि तोमर एवं समस्त तोमर परिवार

  • श्रद्धांजलि: बुझ गया घर का सबसे पुराना चिराग, यादों की छांव छोड़ गईं ‘राज श्री’ देवी

    श्रद्धांजलि: बुझ गया घर का सबसे पुराना चिराग, यादों की छांव छोड़ गईं ‘राज श्री’ देवी

    अजनबी न्यूज शिवपुरी। कहते हैं कि घर की बुजुर्ग महिलाएं उस बरगद की तरह होती हैं जिसकी शीतल छांव में पीढ़ियां जवान होती हैं। आज तोमर परिवार की वही ममतामयी छांव छिन गई है। अत्यंत दुखद हृदय के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि श्रीमती राज श्री देवी (धर्मपत्नी श्री लज्जाराम सिंह तोमर) आज अपनी जीवन यात्रा पूर्ण कर देवलोक गमन कर गई हैं।

    ​वे केवल एक नाम नहीं, बल्कि अनुशासन, स्नेह और संस्कारों की वो जीवंत प्रतिमूर्ति थीं, जिन्होंने पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोए रखा। उनके जाने से घर के आंगन में वो खालीपन आ गया है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। उनकी मुस्कान और आशीर्वाद अब केवल स्मृतियों में शेष रहेंगे।

    ​अंतिम विदाई (अंतिम यात्रा)

    ​अपनी दादी माँ को सजल नेत्रों से विदाई देने के लिए उनकी अंतिम यात्रा आज आयोजित की गई है:

    ​समय: आज दोपहर 2:00 बजे

    ​स्थान (प्रस्थान): डॉ. सुनील तोमर का निवास, कोठी नंबर 6, फिजिकल, शिवपुरी।

    ​गंतव्य: मुक्तिधाम, शिवपुरी।

    ​”मां, दादी, और मार्गदर्शक… आप भले ही हमसे दूर चली गईं, लेकिन आपके दिए हुए संस्कार हमारे जीवन की हर राह को रोशन करते रहेंगे।”

    ​शोकाकुल:

    डॉ. सुनील तोमर एवं समस्त तोमर परिवार

     

  • सहायक नेत्र चिकित्सक हरिओम श्रीवास्तव हुए सेवानिवृत्त; ईमानदारी और सेवा भाव के लिए जाने जाएंगे

    सहायक नेत्र चिकित्सक हरिओम श्रीवास्तव हुए सेवानिवृत्त; ईमानदारी और सेवा भाव के लिए जाने जाएंगे

           // राहुल अष्ठाना “अजनबी”//

    अजनबी न्यूज ​शिवपुरी। स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय तक अपनी सेवाएँ देने वाले सहायक नेत्र चिकित्सक हरिओम श्रीवास्तव आज अपनी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो गए। उनके विदाई अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सहकर्मियों और शहरवासियों ने उनके अनुकरणीय कार्यकाल की सराहना की।

    ईमानदारी और साफ-स्वच्छ छवि की मिसाल

    ​हरिओम श्रीवास्तव का पूरा कार्यकाल बेदाग और पारदर्शिता से भरा रहा। विभाग में उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में रही जिन्होंने हमेशा नियमों का पालन किया और अनुशासन के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। सहकर्मियों के अनुसार, श्रीवास्तव जी ने कभी भी अपने काम में कोताही नहीं बरती और उनकी ‘साफ-स्वच्छ छवि’ नए आने वाले चिकित्सकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

    मरीजों को माना अपना परिवार

    ​उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता मरीजों के प्रति उनका मानवीय दृष्टिकोण रहा। उन्होंने अस्पताल आने वाले हर मरीज को केवल एक ‘रोगी’ नहीं, बल्कि ‘परिवार का सदस्य’ मानकर उनकी सेवा की। उनकी सौम्य वाणी और संवेदनशीलता के कारण मरीज उन पर अटूट विश्वास करते थे। विदाई के क्षणों में कई पुराने मरीजों ने भी उपस्थित होकर उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

    सहकर्मियों ने दी भावभीनी विदाई

    ​विदाई समारोह के दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सहयोगियों ने उन्हें फूल-मालाओं और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। वक्ताओं ने कहा कि:

    ​”हरिओम जी जैसे समर्पित चिकित्सक का जाना विभाग के लिए एक बड़ी रिक्ति है। उनकी ईमानदारी और मरीजों के प्रति प्रेम को हमेशा याद रखा जाएगा।”

    सेवानिवृत्त हुए नेत्र सहायक हरिओम श्रीवास्तव, बेटों ने भी समाज में बढ़ाया मान

    स्वास्थ्य विभाग में अपनी निष्कलंक सेवा और सेवाभावी स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले सहायक नेत्र चिकित्सक हरिओम श्रीवास्तव आज अपनी शासकीय सेवाओं से सेवानिवृत्त हो गए। जहाँ एक ओर विभाग ने उन्हें एक कर्मठ योद्धा के रूप में विदाई दी, वहीं उनके परिवार और बेटों की उपलब्धियों ने इस पल को और भी गौरवान्वित कर दिया है।

     

    ईमानदारी और सेवा भाव की मिसाल

    ​हरिओम श्रीवास्तव का कार्यकाल हमेशा ईमानदारी और साफ-स्वच्छ छवि के लिए जाना गया। उन्होंने अस्पताल आने वाले हर मरीज को अपना परिवार मानकर उनकी सेवा की। उनकी सौम्य कार्यप्रणाली और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता ने उन्हें स्वास्थ्य विभाग में एक अलग पहचान दिलाई। विदाई के समय सहकर्मियों ने उनके अटूट समर्पण की जमकर प्रशंसा की।

    होनहार बेटों ने किया कायस्थ समाज का नाम रोशन

    ​श्रीवास्तव जी की सफलता केवल उनके करियर तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उनके द्वारा दिए गए संस्कारों का प्रतिफल उनके दोनों बेटों की सफलता में भी झलकता है। उनके दोनों होनहार बेटों ने अपनी मेहनत से कायस्थ समाज और शिवपुरी जिले का नाम रोशन किया है। ​अनुभव श्रीवास्तव (बड़ा बेटा) वर्तमान में ओरिएंटल इंश्योरेंस जैसी प्रतिष्ठित संस्था में मैनेजर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ​अंकित श्रीवास्तव (छोटा बेटा) वर्तमान में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), शिवपुरी में कनिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी (Junior Statistical Officer) के रूप में कार्यरत हैं।

    संस्कारों की जीत

    इस दौरान ​समाज के प्रबुद्ध जनों का कहना है कि यह एक आदर्श परिवार का उदाहरण है, जहाँ पिता ने ईमानदारी से विभाग की सेवा की और उन्हीं पदचिन्हों पर चलते हुए दोनों पुत्रों ने भी प्रशासनिक और वित्तीय क्षेत्रों में सफलता के झंडे गाड़े हैं। विदाई समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने हरिओम श्रीवास्तव जी को उनके सुखद और स्वास्थ्यप्रद सेवानिवृत्त जीवन की शुभकामनाएं दीं।

    ​”एक सफल करियर और बच्चों को उच्च पदों पर देखना ही एक अभिभावक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। हरिओम जी ने इसे अपनी मेहनत और ईमानदारी से सच कर दिखाया है।”

     

  • सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित

    सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित

    *कार्यशाला में विशेषज्ञ डॉक्टर्स ने रखे विचार*

    शिवपुरी। श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, शिवपुरी में स्त्री एवं प्रसूती विभाग द्वारा अधिष्ठाता डॉक्टर डी परमहंस के मार्गदर्शन, अधीक्षक डॉक्टर आशुतोष चौऋषि के नेतृत्व में गुरुवार को (“PREVENTION AND SCREENING OF CERVICAL CANCER”) सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता के साथ वैक्‍सीनेशन, सरकार द्वारा सर्वाइकल कैंसर से बचाने वाली एचपीवी वैक्सीन को बढ़ावा देने पर कार्यशाला आयोजित कर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में ग्वालियर जिले से गाइनिकोलॉजिस्ट डॉ स्वाति अग्रवाल शिवपुरी जिले से डॉ उमा जैन आदि ने सर्वाइकल कैंसर के उपचार व रोकथाम पर चर्चा की। कार्यशाला में चिकित्सा महाविद्यालय शिवपुरी में अध्ययनरत एमबीबीएस छात्र – छात्राओं द्वारा सर्वाइकल कैंसर पर नुक्कड़ नाटक तथा पोस्टर प्रस्तुतिकरण किया गया।

    कार्यक्रम के दौरान डीन डॉक्टर डी.परमहंस ने कहा कि सरकार द्रारा सर्वाइकल कैंसर के खात्‍मे के लिए “क्वाड कैंसर मूनशॉट” नाम की एक पहल शुरू की। इसका लक्ष्‍य सवाईकल कैंसर की जांच और वैक्‍सीनेशन कार्यक्रम को बढ़ाने के साथ प्रारंभिक स्‍टेज की पहचान और प्रभावी इलाज उपलब्‍ध करना है।

    चिकित्सालय अधीक्षक डॉक्टर आशुतोष चौऋषि ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए इसके लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्‍टर को दिखाएं, क्‍योंकि यदि एक बार यह बढ़ गया तो मरीज को काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही यह भी कहा कि जागरूकता और नियमित जांच से सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा इसके कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें। किसी भी लक्षण को हल्‍के में लेना भारी पड़ सकता है। कि नियमित जांच से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि सर्वाइकल कैंसर को शुरुआत में ही पहचान लिया जाए, तो हजारों जान बचाई जा सकती हैं।

     

    सर्वाइकल कैंसर क्‍या होता है?

    सर्वाइकल कैंसर को आम बोलचाल की भाषा में बच्‍चेदानी के मुंह का कैंसर भी बोलते हैं। दिल्‍ली की वरिष्‍ठ गायनेकोलॉजिस्ट डॉ स्वाति अग्रवाल शिवपुरी जिले से डॉ उमा जैन, डॉ कल्पना बंसल, डॉ अनीता वर्मा, डॉ वीणा कुमरा, डॉ शैली सेंगर, डॉ शिखा जैन, डॉ नीलम सिंह, डाॅ सुनीता गुप्ता डॉ सुनीता जैन, डॉ शोभा जैन डॉ मोनिका मंगल, डॉ अर्चना दुबे, डॉ प्रणीता जैन ने कार्यशाला में सर्वाइकल कैंसर के बारे में विस्‍तार से बताते हुए कहा कि यह कैंसर गर्भाशय ग्रीवा में होता है। गर्भाशय बच्चे के विकास का स्थान होता है, जबकि ग्रीवा गर्भाशय को योनि से जोड़ता है। यह कैंसर गर्भाशय और ग्रीवा की परत में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि है। इस कैंसर का मुख्‍य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है। इसके सौ से ज्‍यादा प्रकार होते हैं।

     

    सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

    सर्वाइकल कैंसर के लक्षण शुरुआत में बिल्कुल पता नहीं चलते हैं। कई सालों बाद इसके लक्षण उभरने लगते हैं। जैसे-जैसे यह बढ़ता है, शरीर में इसके लक्षण दिखने लगते हैं। सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख लक्षणों में योनि से बदबूदार पानी निकलना, संबंध बनाने के दौरान दर्द और खून निकलना है। इसके अलावा पीठ में हल्‍का दर्द, पैरों में सूजन होना इसके लक्षण हो सकते हैं। इस दौरान विभागाध्यक्ष डॉक्टर अनंत राखोन्डे, विभागाध्यक्ष डॉक्टर अपराजिता तोमर, विभागाध्यक्ष डॉक्टर पंकज शर्मा,सहित कॉलेज के समस्त वरिष्ठ सीनीयर, जूनियर डॉक्टर्स, नर्सिंग ऑफिसर, पैरामेडिकल स्टाफ के साथ एमबीबीएस छात्र – छात्राऐं उपस्थित हुए।

  • व्हाइट कोट पेशेवरता, विश्वास और मरीजों की सेवा करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक: डीन डॉ डी.परमहंस

    व्हाइट कोट पेशेवरता, विश्वास और मरीजों की सेवा करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक: डीन डॉ डी.परमहंस

    मेडिकल कॉलेज में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए व्हाइट कोट सेरेमनी का हुआ आयोजन

    अजनबी न्यूज शिवपुरी। श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय शिवपुरी में शुक्रवार को मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित, पुष्प अर्पण कर व्हाइट कोट सेरेमनी का शुभारंभ मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉक्टर डी.परमहंस, अधीक्षक डॉक्टर आशुतोष चौऋषि ,को-ऑर्डिनेटर एमईयू डॉ. ईला गुजारिया, विभागाध्यक्ष डॉक्टर के. बी. वर्मा, सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ अनन्त राखोंडे ,कम्यूनिटी मेडिसिन विभागायध्यक्ष डॉ राजेश अहिरवार, विभागाध्यक्ष डॉक्टर अपराजिता तोमर द्वारा किया गया। मेडिकल कॉलेज में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए व्हाइट कोट सेरेमनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के समस्त विभाग अध्यक्षों,अन्य चिकित्सा शिक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं को व्हाइट कोट पहना कर प्रोत्साहित किया।

    डीन डॉक्टर डी.परमहंस ने एमबीबीएस छात्र – छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि व्हाइट कोट प्रतीकात्मक संस्कार है। व्हाइट कोट नए छात्र-छात्राओं को चिकित्सा के क्षेत्र में शामिल करता है। चिकित्सा पेशे में मेहनत, समर्पण, करुणा और सहानुभूति की जरूरत होती है। आपने जो व्हाइट कोट पहना है यह बड़ी जिम्मेदारी है। साथ ही यह भी कहा कि अभी आप कच्चे घड़े हो आपको किस तरह किस सांचे में ढलना यह आपके ऊपर निर्भर करता है “ढलना” शब्द का मतलब सही ‘आकार लेना’ और ‘पकना’ है, संबोधित करते हुए यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स (National Task Force – NTF) का भी गठन किया गया है। राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की रोकथाम के लिए की गई है। इस टास्क फोर्स का उद्देश्य छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करना और उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या की घटनाओं को रोकना है। इसी के साथ अर्ली क्लीनिकल एक्सपोसर (ECE) प्रक्रिया के तहत आप नवागत छात्र- छात्राओं को उनकी पढ़ाई के शुरुआती दौर में ही अस्पताल जैसे क्लिनिकल माहौल में अनुभव मिलता है। यह अनुभव छात्रों को चिकित्सा की वास्तविकताओं से परिचित कराता है, उनके बुनियादी विज्ञान की शिक्षा को नैदानिक ​​संदर्भ प्रदान करता है। साथ ही यह भी कहा कि कॉलेज में शैक्षिक माहौल प्रदान करना उनकी जिम्मेदारी है। इसके लिए कॉलेज फैकल्टी प्रतिबद्ध है। चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के दौरान कई प्रकार के अनुभव आपको मिलेंगे।

    इसके साथ ही को-ऑर्डिनेटर एमईयू मेडिकल डॉ. ईला गुजारिया ने कहा कि एमबीबीएस छात्र-छात्राएं जो व्हाइट कोट पहन रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि व्हाइट कोट क्यों पहना जाता है। इसका महत्व क्या है। इसे पहनकर चिकित्सक के पेशे को अपना लेना ही काफी नहीं है। व्हाइट कोट के पीछे बड़ी जिम्मेदारी छिपी हुई हैं। इन सारी जिम्मेदारियों का अहसास कराने के लिए ही मेडिकल कॉलेज में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए व्हाइट कोट सेरेमनी का आयोजन किया गया है। जिससे विद्यार्थी चिकित्सक के पेशे के ग्लैमर के साथ ही अपनी जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखें।व्हाइट कोट पहनकर मानवता की सेवा के लिए समर्पित मार्ग चुनना आपकी जिम्मेदारी है। इस दौरान उन्हें अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया। वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा अभिभावकों के साथ मीटिंग कर अभिभावकों को कॉलेज की सुविधाएं दिखाई गई। बताया गया कि पेरेंट्स बराबर संपर्क में रहें, ताकि वे मानसिक तनाव से दूर सकें। छात्र – छात्राऐं गलत संगत में पड़कर बुरी आदत नहीं अपनाएं।

     

    व्हाइट कोट सेरेमनी के दौरान विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रिंयका गर्ग ने छात्र – छात्राओं को व्हाइट कोट सेरेमनी की शपथ भी दिलाई गई। जिसमें कहा गया कि इस व्हाइट कोट को पहनकर अपनी आखिरी सांस या धरती पर मौजूद पीड़ित मानवों की जिंदगी को बचाने की कोशिश करेंगे।

    कार्यक्रम का सफल संचालन उप रजिस्ट्रार डॉक्टर उर्वशी मारवाह द्रारा किया गया साथ ही धन्यवाद ज्ञापित डॉक्टर विजय प्रसाद द्वारा किया गया। इस दौरान कॉलेज के समस्त वरिष्ठ सीनीयर, जूनियर डॉक्टर्स के साथ एमबीबीएस छात्र – छात्राओं के दूर दराज से आए परिजन उपस्थित हुए।