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  • आखिर बाढ़ में क्यों डूब रहे हैं दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु जैसे हमारे मेट्रो शहर?

    आखिर बाढ़ में क्यों डूब रहे हैं दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु जैसे हमारे मेट्रो शहर?

    पहाड़ से लेकर मैदानी इलाकों तक बारिश तबाही मचा रही है. हाल के दिनों में दिल्ली की सड़कें पानी में डूबी नजर आईं. मुंबई में भी सैलाब का नजारा दिखा. ये हाल सिर्फ इन मेट्रो शहरों का ही नहीं है बल्कि देश के कई राज्यों की मेट्रो सिटी से लेकर महानगरों तक जल प्रलय से बच नहीं पाए. यह हाल उन शहरों का है जहां सरकारें इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम पर भारी भरकम बजट खर्च करने की बात करती हैं लेकिन तबाही का मंजर हर साल सामने आकर खड़ा हो जाता है और सारी तैयारियां इसको रोकने में नाकाफी साबित होती हैं.

    दरअसल, देश के बढ़ते शहरी क्षेत्र बाढ़ और उसके संकट को लेकर संवेदनशील होते जा रहे हैं. इसकी वजह से बिजली की लाइनें टूटना, दुर्घटनाएं, कारों का डूबना और पानी से भरे अंडरपास में मौतें आम बात हो गई हैं. विशेषज्ञों और शहरी योजनाकारों ने इस शहरी बाढ़ का कारण अनियंत्रित विकास और बदलते मौसम को प्रमुख कारण माना है. जानकारों की मानें तो भारत में शहरी आबादी जिस दर से बढ़ रही है, उसके साथ तैयारी का तालमेल नहीं बन पा रहा है.

    राज्य सरकार की विफलताएं
    पिछले हफ्ते, यमुना नदी में जल स्तर अब तक के हाई लेवल पर पहुंच गया, जिससे दिल्ली के कई इलाकों में बाढ़ आ गई. वहीं एक बार फिर यमुना उफना रही है. इस महीने की शुरुआत में मुंबई में बाढ़ आई, जबकि अहमदाबाद और गुरुग्राम जैसे शहर भी मानसून की बारिश में डूब गए. नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चेन्नई में 2015 की बाढ़, जिसमें 289 लोग मारे गए थे. वह भारी बारिश के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों की ओर से कई विफलताओं के कारण हुई थी. इस रिपोर्ट में राज्य सरकार की आलोचना की गई.

    सामान्य बारिश के लिए भी नहीं तैयार
    प्रख्यात जलवायु वैज्ञानिक प्रोफेसर जे श्रीनिवासन का कहना है कि शहर की बढ़ती आबादी के साथ-साथ भौतिक बुनियादी ढांचे की मांग को पूरा करने की दोहरी चुनौतियों से जूझ रहे हैं. इसकी वजह से वह मौसम की घटनाओं, यहां तक कि सामान्य बारिश के लिए भी तैयार नहीं हो पा रहे हैं. आप हमेशा मानसून को दोष नहीं दे सकते. हमारे शहरी क्षेत्रों का प्रबंधन ठीक से नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि हमारी जनसंख्या बढ़ गई है और इसलिए शहर की मांगें नई हैं. उन्हें उस हिसाब से तैयार करना पड़ेगा.

    बारिश के पानी का सीमित रिसाव
    शहरों में जनसंख्या बढ़ने का मतलब है प्राकृतिक बुनियादी ढांचे का नुकसान, सिकुड़ते जल निकाय, निचले और संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण, पहले से ही लबालब, खराब रखरखाव वाली नालियों का अतिक्रमण. इसके साथ ही अधिक सड़कों और फुटपाथों का मतलब है बारिश के पानी का सीमित रिसाव फिर इसका परिणाम बाढ़ और जलजमाव के रुप में हमारे सामने आता है.

    ड्रेनेज मैनेजमेंट प्लान नहीं हुआ लागू
    एक रिपोर्ट के मुताबिक आईआईटी के एक प्लान आया था ड्रेनेज मैनेजमेंट प्लान, जो कि शहरों की गलियों और सड़कों पर रुकने वाले पानी को बाहर निकालने के लिए था. लेकिन साल 2018 में दिल्ली सरकार ने इसको बहुत गंभीरता से नहीं लिया. अब हाल ही में हमने देखा कि राजधानी की स्थिति क्या हुई. भारी बारिश के साथ जब यमुना उफनाई तो उसने दिल्ली के कई इलाकों को तालाब बना दिया. हालात ये हो गए कि लोगों को नाव से रेस्क्यू करके निकाला गया.

    तेजी से बढ़ रही शहरों की जनसंख्या
    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभी 37 करोड़ लोग शहरों में रह रहे हैं. लेकिन 2060 तक यह आंकड़ा 60 करोड़ और 2080 तक 80 करोड़ तक पहुंच जाएगा. अब इसको कंट्रोल करने या उस हिसाब से शहरों को तैयार करने की योजना सरकारों के पास नहीं है. अगर है भी तो बजट न होने का हवाला दे दिया जाता है. दरअसल हमारे देश में त्रिस्तरीय व्यवस्था चलती है. इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार, अर्बन लोकल बॉडी यानि नगर निगम या निकाय और पंचायती राज शामिल है. इसमें सबसे बड़ा रोल अर्बन लोकल बॉडी का होता है.

    डिसेंट्रलाइजेशन से खत्म होगी समस्या
    अब नगर निगम या निकाय का काम शहर की व्यवस्था को ठीक रखना है, उसमें पानी, सड़क, अतिक्रमण जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल हैं. लेकिन यह अपना काम कभी लापरवाही तो कबी बजट की कमी में नहीं कर पाते. समझने वाली बात यह है कि ये चीजें तब तक ठीक नहीं होंगी जब तक विकेन्द्रीकरण (Decentralisation) की व्यवस्था लागू नहीं होगी. इसका मतलब यह है कि निगमों, निकायों और पंचायतों को इतनी तकत देनी होगी की वो ग्रांट पर निर्भर न रहें.

    आबादी के हिसाब से स्टाफ की कमी
    दरअसल आज की हालत यह है कि शहरों के मेयर के पास ज्यादा कुछ पावर होती ही नहीं है. अब ऐसे में नगर निगम और नगर निकाय भारी भरकम टैक्स जुटाकर राज्य सरकार और केंद्र सरकारों को देते हैं लेकिन उन्हें खर्च करने का अधिकार नहीं हैं. खर्चे के लिए उन्हें राज्य सरकार के आगे हाथ फैलाना ही है. अब होता यह है कि जितनी जरुरत है कई बार उतना पैसा मिल नहीं पाता. इसके साथ साथ शहरों की आबादी के हिसाब से स्टाफ की कमी भी एक बड़ी समस्या है जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं.

    जल निकासी की मजबूत व्यवस्था

    कुल मिलाकर बारिश और बाढ़ से निपटने के लिए जल निकासी का मजबूत व्यवस्था बनानी होगी. इसके लिए शहरी प्लानिंग के लिए बजट को प्राथमिकता के रुप में लेना होगा. अगर हम इसको लेकर गंभीर नहीं होगी तो प्राकृतिक आपदा हमारे जीवन की मुश्किलें बढ़ाती रहेगी.

  • Tomato Price: ट्रक पलटने से गिरा था 15 लाख का टमाटर, देनी पड़ी ‘Z Plus’ सुरक्षा

    Tomato Price: ट्रक पलटने से गिरा था 15 लाख का टमाटर, देनी पड़ी ‘Z Plus’ सुरक्षा

    देशभर में टमाटर की कीमत सातवें आसमान पर है. आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई है. गरीब लोगों ने टमाटर खरीदना छोड़ दिया है. सबसे महंगी सब्जी में गिना जाने लगा है. कई किसान तो टमाटर बेचकर करोड़पती बन गए. कहीं टमाटर से लदी ट्रकों पर डाका पड़ गया. पूरा का पूरा ट्रक लूट लिया गया. किसान अपने खेतों की रखवाली कर रहे हैं. मंडियों में तो सुरक्षा गार्ड की तैनाती करनी पड़ी है.

    इसी तरह टमाटर को लेकर हर दिन कोई न कोई घटना सामने आ ही जाती है. कुछ दिनों पहले टमाटर से भरी एक ट्रक कर्नाटक से दिल्ली आ रही थी, जब तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में पलट गई. आमतौर पर इस तरह की घटनाओं के बाद देखा जाता है कि लोग पहले लूटपाट करना शुरू कर देते हैं. ऐसे में पुलिस की एक टीम पहले ही मौके पर पहुंच गई. टमामटर को सुरक्षा दी.

    जब गिरा 15 लाख रुपए कीमत के टमाटर का ट्रे

    एक अन्य घटना तेलंगाना की है. यहां कोमराम जिले में टमाटर से भरी एक अन्य ट्रक पलट गई. मिनी ट्रक टमाटर की खेप लेकर जा रही थी जब एक तेज रफ्तार कार ने उसे ओवरटेक किया. कार को बचाने के चक्कर में ट्रक दुर्घटना का शिकार हो गया. ड्राइवर ने बताया कि ट्रक की रफ्तार ज्यादा तेज नहीं थी लेकिन तेज रफ्तार कार को साइड देने के चक्कर में उन्होंने अपना नियंत्रण खो दिया.
    ड्राइवर ने बताया कि ट्रक पलटने से टमाटर से भरा एक ट्रे नीचे गिर गया. बताया जा रहा है कि इसमें 15 लाख रुपए के टमाटर लदे थे. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वे मौके पर पहुंचे और टमाटर के ट्रे को बंदूकों के साथ सुरक्षा प्रदान की. उन्हें डर था कि दुर्घटना स्थल से टमाटर की लूट हो सकती है.

    टमाटर से लदा ट्रक ले फरार हुए पति-पत्नी

    कुछ दिनों पहले ही कर्नाटक के बेलूर में एक महिला के खेत से ढाई लाख रुपए के टमाटर की चोरी हो गई थी. सोमनहल्ली गांव में 4 जुलाई की रात एक साजिश के तहत इस चोरी को अंजाम दिय गया. टमाटर के 50-60 बैग चोर लेकर फरार हो गए थे. कर्नाटक के ही वेल्लोर में एक पिकअप पर ढाई लाख का टमाटर लदा था. यहां एक दंपत्ति ने खुद एक्सीडेंट किया और मुआवजे के लिए लड़ाई की. देखा कि पिकअप ड्राइवर मुआवजा देने के मूड में नहीं है तो वे पिकअप लेकर फरार हो गए.

    टमाटर का दाम बता दें तो आ जाएगी ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने की नौबत

    टमाटर इन दिनों सबसे महंगी सब्जियों की लिस्ट में बना हुआ है. अगर आप मंडी में एक किलो टमाटर का दाम पूछेंगे तो दुकानदार आपको सिर्फ ढाई सौ ग्राम टमाटर का ही दाम बताएगा. इसके पीछे वह कहते हैं कि किलो का दाम बताने पर ग्राहक मुंह मोड़ लेते हैं. अगर किलो का दाम बता दें तो ग्राहकों को बोतल चढ़ाने की नौबत आ जाएगी. मार्केट में टमाटर 40 रुपए पाव से नीचे ही नहीं आ रहा है. दुकानदार तो यह तक कहने लगे हैं कि 10 महीने सस्ता खाते हैं तो दो महीने महंगा टमाटर भी खा लीजिए. अब उन्हें कौन बताए कि टमाटर खरीदने के लिए हम कितना पसीना बहाते हैं.

  • गाजियाबाद में हिंडन नदी में आई बाढ़, लोगों के घर में घुसा पानी, कई गावों को खाली करने का अलर्ट

    गाजियाबाद में हिंडन नदी में आई बाढ़, लोगों के घर में घुसा पानी, कई गावों को खाली करने का अलर्ट

    दिल्ली में यमुना नदी एक बार फिर से उफान पर है। दिल्ली में यमुना नदी एक बार फिर से खतरे के निशान को पार कर गई है। यमुना का जलस्तर 206.26 मीटर पर पहुंच गया है। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाके के लोग फिर से परेशान होने लगे है। हालांकि इस बार सिर्फ दिल्ली ही बाढ़ के खतरे को नहीं झेल रही है। इस बार बाढ़ की चपेट में दिल्ली के अलावा एनसीआर का भी इलाका आ रहा है। नोएडा और गाजियाबाद में भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि हिंडन नदी में भी बाढ़ का पानी आ गया है।

    हिंडन नदी में बाढ़ आने के कारण कई इलाकों में पानी भर गया है। फायर ब्रिगेड की टीम ने कई घरों को एहतियात के तौर पर खाली करवाया है। हिंडन नदी में जलस्तर अधिक बढ़ सकता है। बाढ़ का पानी आने से जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है। कुछ दिनों पहले भी नोएडा के सेक्टर 135 में पानी भर गया था। इसके बाद यहां जमजमाव हो गया था। इस इलाके में जलस्तर कम होने के बाद लोगों को राहत मिली थी। मगर अब हिंडन नदी में फिर पानी का स्तर बढ़ गया है। इस कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोग घरों से पलायन कर घर छोड़कर और कहीं रहने को मजबूर हुए है।

    बाढ़ आने के कारण गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन ने भी कदम उठाए है। हिंडन नदी में बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए निचले इलाकों में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। अधिकारियों ने ये जानकारी साझा की है। अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को नदी का जलस्तर बढ़ने की चेतावनी जारी की गई थी। इसके साथ ही पांच गावों के लगभग 200 लोगों को शनिवार को राहत कैंपों में भेजा गया है। इन कैंप में प्रशासन की ओर से खाने पीने और स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था की गई है।
    अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अतुल कुमार ने बताया कि काली नदी से लगातार हिंडन में पानी छोड़ा जा रहा है। जिसकी वजह से नदी का जलस्तर बढ़ा है।उन्होंने बताया कि गाजियाबाद बैराज पर हिंडन नदी के खतरे का निशान 205.80 मीटर है और इस समय नदी का जल स्तर 200.65 मीटर है। गौतमबुद्ध नगर जिला हिंडन और यमुना नदियों के बीच स्थित है। जिले में हाल ही में यमुना नदी के किनारे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई थी जिससे करीब 550 हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो गई और हजारों लोग और मवेशी प्रभावित हुए थे।

  • आसमान से महिला के ऊपर गिरा रहस्यमय पत्थर, देखकर वैज्ञानिक भी रह गए दंग

    आसमान से महिला के ऊपर गिरा रहस्यमय पत्थर, देखकर वैज्ञानिक भी रह गए दंग

    कभी-कभी दुनिया में कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती हैं, जो सिर्फ आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी हैरान करने वाली होती हैं. जरा सोचिए, आप अपनी घर की छत पर बैठे हैं, मजे से चाय-कॉफी पी रहे हैं और तभी आसमान से आपके शरीर पर कोई रहस्यमय चीज गिर जाए तो? आपको लग रहा होगा कि ये तो सिर्फ ख्याली पुलाव है, लेकिन फ्रांस में एक महिला के साथ ऐसी ही एक घटना घटी है. वह छत पर बैठी अपनी एक दोस्त के साथ कॉफी पी रही थी कि तभी आसमान से उसके शरीर पर एक रहस्यमय पत्थर गिरा, जिसे देख कर वो भी शॉक्ड रह गई.
    न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना बीते 6 जुलाई की है. महिला ने बताया कि वो अपनी एक दोस्त के साथ छत पर थी, तभी वहां एक जोरदार धमाका हुआ. अभी वो उठकर देखते और मामले को समझते कि तभी महिला के ऊपर कोई चीज गिरी. ऐसा लगा जैसे उस चीज ने उसकी हड्डी को ही तोड़ दिया. हालांकि तब तक उसे पता नहीं था कि वो चीज है क्या? उसे लगा कि शायद कोई चमगादड़ होगा, जो रात के समय अक्सर इधर-उधर उड़ते हुए पाए जाते हैं. इसके अलावा उसे ये भी लग रहा था कि वो चीज ईंट या सीमेंट का कोई टुकड़ा भी हो सकता है, लेकिन फिर नजर पड़ी उस चीज पर, जो किसी पत्थर की तरह लग रही थी और काले रंग की थी.

    उल्कापिंड था वो पत्थर

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला ने उस पत्थर को संभालकर रख लिया और फिर उसे जांच के लिए भेज दिया. फिर पता चला कि वो पत्थर असल में एक उल्कापिंड था, जो काले रंग का तो था, लेकिन बेहद ही चमकदार भी था. भूविज्ञानी थिएरी रेबमैन ने इसकी पुष्टि की कि वो टुकड़ा उल्कापिंड ही है, जो सिलिकॉन और लोहे से बना हुआ है.

    वैसे आमतौर पर तो उल्कापिंड धरती पर अक्सर गिरते रहते हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता कि किसी के शरीर पर ही आकर कोई उल्कापिंड गिर जाए. महिला के साथ हुई घटना बेहद ही दुर्लभ है.

     

  • दिल्ली में फिर तबाही मचाएगी यमुना? हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 2 लाख क्यूसेक पानी

    दिल्ली में फिर तबाही मचाएगी यमुना? हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया 2 लाख क्यूसेक पानी

    दिल्ली में बाढ़ का खतरा अभी तक टला नहीं है. हथिनीकुंड बैराज से एक बार फिर से पानी छोड़े जाने की वजह से यमुना नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका व्यक्त की गई है. बैराज से छोड़ा गया पानी कल शाम तक दिल्ली पहुंचेगा ऐसे में यमुना का जलस्तर 206.70 मीटर पहुंचने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है. जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए दिल्ली प्रशासन ने निचले इलाकों में मुनादी करना शुरू कर दिया है.
    शुक्रवार शाम जहां नदी का जलस्तर 205.34 मीटर दर्ज किया गया था वहां, आज यानी शनिवार को दोपहर तीन बजे जलस्तर मामूली गिरावट के बाद 205.17 दर्ज किया गया है. हालांकि, देर शाम या फिर रात में नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका व्यक्त की गई है. कल यानी रविवार शाम तक यमुना का जलस्तर 206.70 पहुंच सकता है. ऐसे में दिल्ली में एक बार फिर से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है.
    जानकारी के मुताबिक, शनिवार को हथिनीकुंड बैराज से 2 लाख 9 हजार क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया है. पिछले हफ्ते यमुना के पानी ने ही दिल्ली में भारी तबाही मचाई थी और लाल किला, दिल्ली सचिवालय, अक्षरधाम, मयूर बिहार समेत कई इलाके जलमग्न हो गए थे. अब जब यमुना नदी का जलस्तर धीरे-धीरे नीचे जा रहा था कि बैराज से पानी छोड़ दिया गया है.
    पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश दिल्ली के लिए बनी आफत

    दरअसल, पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश की वजह से यमुना नदी का जलस्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है. यही वजह है कि हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है. हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी को दिल्ली पहुंचने में 24 घंटे से अधिक का समय लगता है.
    हिंडन नदी भी उफान पर

    उधर गाजियाबाद में हिंडन नदी भी उफान पर है. नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी वजह से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. स्थिति ऐसे हो गई है कि हिंडन नदी का पानी हिंडन बिहार, सिटी फॉरेस्टर कॉलोनी, कृष्णा गौशाला कॉलोनी और नंद ग्राम कॉलोनी इलाके में घुस गया है. यहां भी प्रशासन की ओर से नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है. पुलिस और एनडीआरएफ की टीम ने नदी किनारे फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए रेस्क्यू अभियान चला था. इसके लिए 17 ट्रैक्टरों की मदद ली गई.

  • Whatsapp अपने यूजर्स के लिए लाने जा रहा है यह शानदार फीचर, जानिए डिटेल में

    Whatsapp अपने यूजर्स के लिए लाने जा रहा है यह शानदार फीचर, जानिए डिटेल में

    दुनियाभर में मशहूर मैसेजिंग सॉफ्टवेयर WhatsApp का इस्तेमाल लाखों लोग करते हैं। इस मैसेजिंग ऐप का यूजर इंटरफ़ेस सीधा है। इस वजह से हर दूसरा यूजर व्हाट्सएप का लुत्फ उठाता है। व्हाट्सएप का नया अपडेट फिलहाल टेस्टिंग स्टेज पर है। यह नया बदलाव केवल

    व्हाट्सएप के एंड्रॉइड बीटा टेस्टर्स के लिए पेश किया गया है।
    व्हाट्सएप द्वारा एंड्रॉइड के लिए मीडिया पिकर में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण अपग्रेड किया जा रहा है, हालांकि यह अब केवल बीटा उपयोगकर्ताओं के लिए ही उपलब्ध है।

    मेटा के स्वामित्व वाली मैसेजिंग सेवा व्हाट्सएप के अनुसार, क्रमांकित थंबनेल वाला एक बेहतर मीडिया पिकर अब एंड्रॉइड बीटा के लिए उपलब्ध है। WABetaInfo के अनुसार, नया मीडिया पिकर अब प्रत्येक चयनित आइटम को एक नंबर निर्दिष्ट करता है, जो उसके थंबनेल पर प्रदर्शित होता है। यह नंबरिंग प्रणाली उपभोक्ताओं को एक स्पष्ट दृश्य संदर्भ देती है और उस क्रम से मेल खाती है जिसमें मीडिया आइटम चुने जाते हैं। उपयोगकर्ता जल्द ही एक अलग और बेहतर मीडिया फ़ाइल साझाकरण अनुभव का आनंद ले सकेंगे।

    दुनियाभर में मशहूर मैसेजिंग सॉफ्टवेयर WhatsApp का इस्तेमाल लाखों लोग करते हैं। इस मैसेजिंग ऐप का यूजर इंटरफ़ेस सीधा है। इस वजह से हर दूसरा यूजर व्हाट्सएप का लुत्फ उठाता है। उपयोगकर्ता अनुभव को बढ़ाने के लिए सॉफ़्टवेयर को लगातार नई सुविधाओं के साथ अद्यतन किया जा रहा है, जिसमें केवल एक क्लिक के साथ चैट सत्र शुरू करने की क्षमता भी शामिल है।
    यह जानकारी केवल व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं के लिए प्रासंगिक है। दरअसल, व्हाट्सएप के हर अपडेट की जानकारी देने वाली वेबसाइट Wabeta info की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस सर्विस को नया अपग्रेड मिला है।

    कौन सा नया फीचर लाया जा रहा है?

    ऐप पर मीडिया फ़ाइलें भेजने का तरीका बहुत जल्द बदल जाएगा। पहले की तुलना में अब उपयोगकर्ता अधिक आसानी से मीडिया फ़ाइलें अन्य उपयोगकर्ताओं के साथ साझा कर सकते हैं।

    मीडिया फ़ाइलों का चयन कैसे किया जा सकता है?

    इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि व्हाट्सएप यूजर्स जल्द ही मीडिया फाइल भेजने के अलावा गैलरी से भी फाइल देख सकेंगे। यानी यूजर जितनी फाइल भेज रहा है, उसे स्मार्टफोन की स्क्रीन पर देखा जा सकेगा।

    Wabetainfo की सबसे हालिया रिपोर्ट में व्हाट्सएप के नवीनतम संस्करण का परीक्षण चरण शामिल है। केवल एंड्रॉइड का उपयोग करने वाले व्हाट्सएप बीटा टेस्टर्स को ही यह नया संशोधन प्राप्त हुआ है।

     

    यूजर्स कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं

    व्हाट्सएप का नया अपडेट फिलहाल टेस्टिंग स्टेज पर है। यह नया बदलाव केवल व्हाट्सएप के एंड्रॉइड बीटा टेस्टर्स के लिए पेश किया गया है।

    व्हाट्सएप बीटा वर्जन 2.23.13.6 (एंड्रॉइड 2.23.13.6 के लिए व्हाट्सएप बीटा) के साथ, बीटा टेस्टर नया अपग्रेड डाउनलोड कर सकते हैं। आने वाले दिनों में मैसेजिंग प्रोग्राम व्हाट्सएप का यह अपग्रेड एंड्रॉइड यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

  • Fashion Tips: प्लेन साड़ी के साथ कैरी करें फुल वर्क वाले ब्लाउज डिजाइंस, मिलेगा ग्लैमरस लुक

    Fashion Tips: प्लेन साड़ी के साथ कैरी करें फुल वर्क वाले ब्लाउज डिजाइंस, मिलेगा ग्लैमरस लुक

    साड़ी का चलन कभी आउट ऑफ फैशन नहीं होता है। लेकिन आजकल प्लेन डिजाइन की साड़ी का चलन काफी है। वहीं अगर प्लेन साड़ी की बात करें, तो इसके साथ ब्लाउज का डिजाइन चुनते समय खास ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि स्टाइलिश दिखना हर किसी को अच्छा लगता है। स्टाइलिश दिखने के लिए हम अक्सर अपने वार्डरोब में कई तरह के बदलाव करते रहते हैं। वहीं बाजार में आपको कई तरह के ब्लाउज डिजाइंस मिल जाएंगे।
    बता दें कि अगर आप प्लेन साड़ी पहन रही हैं, तो इसके लिए आपको हैवी वर्क वाला ब्लाउज चुनना चाहिए। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे ब्लाउज डिजाइंस के बारे में बताने जा रहे हैं। जो आपको ग्लैमर और स्टाइलिश लुक देने में मदद करेंगी।

    जैकेट स्टाइल डिजाइन

    अगर आपके कंधे भी भारी हैं और आप एक अच्छा शेप देना चाहती हैं। तो आपको फुल स्लीव का ब्लाउज कैसी करना चाहिए। वहीं आप चाहें तो लेस की मदद से जैकेट डिजाइ भी बनवा सकती हैं। साथ ही डबल लेयर से भी बच सकती हैं। इस तरह का ब्लाउज आपको सिल्क साड़ी के साथ कैरी करना चाहिए।

    लेस वर्क डिजाइन

    डिजाइनर नीतिका गुजराल द्वारा इस खूबसूरत ब्लाउज को डिजाइन किया गया है। अगर आप बॉर्डर वर्क साड़ी के साथ इस तरह का ब्लाउज चुनती हैं। तो यह आप पर काफी अच्छा लगेगा। इसके लिए आप प्लेन साड़ी पर मैचिंग का लेस भी लगवा सकती हैं। साथ ही सेम वैसा ही लेस ब्लाउज में भी लगवा सकती हैं।

    मिरर वर्क डिजाइन

    मिरर वर्क आजकल काफी ट्रेंड में चल रहा है। मार्केट में इस तरह का रेडीमेड ब्लाउज मार्केट में आपको आसानी से मिल जाएगा। डिजाइनर अभिनव मिश्रा द्वारा इस खूबसूरत ब्लाउज को डिजाइन किया गया है। बाजार में आपको इस तरह का ब्लाउज 1000 रुपए से 1500 तक में आसानी से मिल जाएगा।

  • जयशंकर ने हड़काया, कनाडा का दिमाग ठिकाने आया, भारतीय उच्चायुक्त की सुरक्षा को बढ़ाया

    जयशंकर ने हड़काया, कनाडा का दिमाग ठिकाने आया, भारतीय उच्चायुक्त की सुरक्षा को बढ़ाया

    कुछ दिनों पहले की ही बात है जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खालिस्तानी तत्वों को जगह देने को लेकर कनाडा को चेतावनी जारी की थी। जयशंकर का बयान यह सामने आने के बाद आया कि कनाडा में खालिस्तानी धमकी वाले पोस्टरों में भारतीय राजनयिकों के नाम थे। जयशंकर ने कहा कि भारत ने खालिस्तानी पोस्टरों में भारतीय राजनयिकों की तस्वीरों का मुद्दा कनाडाई अधिकारियों के समक्ष उठाया था। जयशंकर ने हिंसा को उकसाने वाली स्थिति से कड़ाई से निपटने और कनाडा में भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया था।
    कनाडा ने क्या लिया एक्शन

    कनाडा ने खालिस्तानी आतंकवादियों के खतरों को देखते हुए भारतीय राजनयिकों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की है। खालिस्तान समर्थक ‘किल इंडिया’ अभियान से जुड़ी ऑनलाइन धमकियों के बाद कनाडा में संघीय सुरक्षा सेवाओं ने ओटावा में भारत के उच्चायुक्त के निवास पर सुरक्षा बढ़ा दी है। एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने 15 अगस्त के लिए ऑनलाइन पोस्ट की गई नवीनतम धमकी को ओटावा, टोरंटो और वैंकूवर में भारत के मिशनों में रैलियों के लिए 8 जुलाई के पहले अभियान की तुलना में “वृद्धि” के रूप में वर्णित किया। कनाडा में मौजूद सभी भारतीय मिशनों की सुरक्षा में भी इजाफा किया गया है।

    बता दें कि एक दिन पहले ही कनाडा और अमेरिका में सक्रिय सिख फॉर जस्टिस का मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी करते हुए भारत को धमकी दी थी। भारत ने औपचारिक रूप से अलगाववादी समूह सिख फॉर जस्टिस या एसएफजे से ‘बेसिज इंडियन मिशन्स’ के नवीनतम खतरे से पहले अपनी चिंताओं से अवगत कराया

  • मानसून में सांस की बीमारियों के बढ़ रहे केस, कहीं आपको भी तो नहीं है ये परेशानी

    मानसून में सांस की बीमारियों के बढ़ रहे केस, कहीं आपको भी तो नहीं है ये परेशानी

    मानसून में कई तरह के इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. लोग पेट की बीमारियों से लेकर डेंगू और मलेरिया जैसे संक्रमण का शिकार होते हैं. लेकिन बारिश के इस मौसम में सांस की बीमारियों के केस भी बढ़ रहे हैं. लोगों को अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी जैसी डिजीज हो रही है. डॉक्टरों का कहना है कि बरसात के दौरान हवा में नमी कम हो जाती है. इससे कई प्रकार के बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं जो रेस्पिरेटरी डिजीज ( सांस की बीमारियां) का कारण बनते हैं.

    डॉक्टरों के मुताबिक, इस समय लोगों को अस्थमा का अटैक आना, सांस लेने में परेशानी और लंग्स इंफेक्शन की समस्या हो रही है. बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक में ये परेशानियां देखी जा रही हैं. ऐसे में इस मौसम में लोगों को सेहत का ध्यान रखना चाहिए. अगर किसी को पहले से सांस की बीमारियां हैं तो उनको खास सावधानी बरतने की जरूरत है.

    क्यों बढ़ जाती हैं सांस की बीमारियां

    मूलचंद हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉ. भगवान मंत्री ने बताया कि इस वेदर में एलर्जी और नमी बढ़ जाती है. इस वजह से हवा में कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं. सांस के जरिए ये लंग्स में जाते हैं और रेस्पिरेटरी डिजीज का कारण बनते हैं. जिन लोगों को पहले से ही सांस की बीमारियां होती हैं उनकी परेशानी इस मौसम में ज्यादा बढ़ जाती है.

    अस्थमा के केस बढ़ जाते हैं

    डॉ मंत्री ने बताया कि बरसात के मौसम में अस्थमा के केस बढ़ जाते हैं. यह फेफड़ों की एक खतरनाक बीमारी है. जिसका समय पर ट्रीटमेंट होना बहुत जरूरी है. अगर किसी को लगातार खांसी आ रही है, चेस्ट में जकड़न है और सांस लेने में भी परेशानी हो रही है तो ये सब अस्थमा के लक्षण हैं. ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

    पहले से जिनको बीमारी है वो सतर्क रहें

    दिल्ली में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राजेश चावला बताते हैं कि सांस की बीमारियों के मरीजों को इस मौसम में खास ध्यान रखने की जरूरत है. अस्थमा के मरीजों को सलाह है कि वे अपनी दवाएं समय पर लें और इनहेलर को साथ रखें. छोटे बच्चों की सेहत का भी ध्यान रखें. अगर उनको सांस फूलने या फिर छाती में घरघराहट की परेशानी हो रही है तो इसे हल्के में न लें. ऐसा इसलिए क्योंकि, बच्चों में सांस की बीमारी निमोनिया भी बन सकती है, जो काफी खतरनाक होता है.

    ऐसे करें बचाव

    1.धूल,मिट्टी और धूएं के दूर रहें 2.कोई स्मोकिंग कर रहा है तो उसके पास न जाएं 3.शरीर को हाइड्रेट रखें 4.समय पर अपनी दवाएं लें 5.ठंडी चीजों के सेवन से बचें 6.बहुत ज्यादा एक्सरसाइज न करें