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  • पेरिस ओलंपिक में विनेश को मेडल मिलेगा या नहीं, आज आ सकता है फैसला, IOC की तरफ से हरीश साल्वे रखेंगे पक्ष

    पेरिस ओलंपिक में विनेश को मेडल मिलेगा या नहीं, आज आ सकता है फैसला, IOC की तरफ से हरीश साल्वे रखेंगे पक्ष

    पेरिस ओलंपिक में भारत की स्टार महिला पहलवान विनेश फोगाट की अर्जी पर अब शुक्रवार को सुनवाई होगी. उन्होंने अयोग्य करार दिए जाने के खिलाफ CAS (Court of Arbitration for Sport) में अपील दायर की थी, जिसे सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया. इसमें उन्होंने संयुक्त सिल्वर मेडल दिए जाने की मांग की है. सुनवाई के लिए खेल मामलों की कोर्ट ने विनेश को अपने वकील भी नियुक्त करने का मौका दिया है. सुनवाई भारतीय समयानुसार दोपहर करीब 1:30 बजे होगी.

    दरअसल, CAS में पहले गुरुवार को ही सुनवाई होनी थी. कॉर्ट ऑफ एर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट ने विनेश का पक्ष रखने के लिए 4 वकीलों की पेशकश की थी. इनके नाम जोएल मोनलुइस, एस्टेले इवानोवा, हैबिन एस्टेले किम और चार्ल्स एमसन है. ये सभी पेरिस 2024 ओलंपिक के लिए CAS के निःशुल्क वकील हैं. लेकिन भारतीय दल ने सुनवाई के लिए भारतीय वकील भी नियुक्त करने के लिए समय मांगा. इस पर कोर्ट ने उन्हें समय देते हुए सुनवाई अगले दिन यानी शुक्रवार के लिए स्थगित कर दी.

    IOA का पक्ष रखेंगे हरीश साल्वे
    जानकारी के मुताबिक भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और किंग्स काउंसिल हरीश साल्वे विनेश फोगाट अयोग्यता केस में CAS के समक्ष आज भारतीय ओलंपिक संघ की ओर से पेश होंगे. साल्वे को आज पेरिस समयानुसार सुबह 10 बजे की सुनवाई में वर्चुअल रूप से पेश होना होगा. साल्वे को मामले की जानकारी दे दी गई है और उनका नाम CAS के समक्ष IOA के वकील के रूप में प्रस्तुत किया गया है.

    इसके अलावा फैसला भी शुक्रवार को ही आ सकता है. लेकिन अगर जज को लगता है कि उन्हें और सुनवाई की जरूरत है तो कोई और तारीख दी जा सकती है. हालांकि ज्यादातर CAS मामलों में फैसला सुनवाई के दिन ही आ जाता है.

    खेल मामलों का निपटारा करता है CAS

    कोर्ट ऑफ अर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट Court of Arbitration for Sport (CAS) दुनिया भर में खेलों के लिए बनाई गई एक स्वतंत्र संस्था है. इसका काम खेल से जुड़े सभी कानूनी विवादों का निपटारा करना है. 1984 में स्थापित अंतरराष्ट्रीय निकाय काम खेल से संबंधित विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से निपटाते का काम करता है. इसका मुख्यालय लॉज़ेन , स्विटजरलैंड में है और इसकी अदालतें न्यूयॉर्क शहर, सिडनी और लॉज़न में स्थित हैं. अस्थायी अदालतें वर्तमान ओलंपिक मेजबान शहरों में भी स्थापित की जाती हैं. इस क्रम में CAS इस बार पेरिस में स्थापित है.

    100 ग्राम वजन के कारण अयोग्य हो गई विनेश

    बता दें कि ओलंपिक में भारत की उम्मीदों को तब झटका लगा जब विनेश फोगाट को डिसक्वालिफाई (अयोग्य) घोष‍ित किया गया है. 50 किलोग्राम फ्रीस्टाइल रेसल‍िंग कैटगरी के फाइनल मुकाबले से महज कुछ घंटे पहले विनेश का वजन करीब 100 ग्राम अधिक पाया गया था. विनेश के पास गोल्ड मेडल जीतने का मौका था, लेक‍िन वजन अधिक होने के कारण फाइनल मुकाबले से कुछ घंटे पहले ही उन्हें अयोग्य करार दे दिया गया. ऐसे में नियम के कारण वह सेमीफाइनल जीतने के बाद भी मेडल से चूक गईं. लेकिन अब CAS में मामला जाने के बाद विनेश को मेडल मिलने की आस फिर से जग गई है.

    विनेश ने एक दिन में जीते थे 3 मैच

    विनेश फोगाट ने 50 किलोग्राम वेट कैटेगरी में मंगलवार को तीन मैच खेले थे. उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में टोक्यो ओलिंपिक की चैंपियन यूई सुसाकी को 3-2 से हराया था. उन्होंने क्वार्टर फाइनल में यूक्रेन की महिला पहलवान ओक्साना लिवाच को 7-5 से और सेमीफाइनल में क्यूबा की रेसलर युसनेइलिस गुजमैन को 5-0 से पटखनी दी थी. इसके बाद उनका मुकाबला अमेरिकी रेसलर सारा के साथ गोल्ड मेडल के लिए होना था.

    कुश्ती को कह दिया अलविदा

    पेरिस ओलंपिक से डिसक्वालिफाई होने के बाद भारतीय पहलवान विनेश फोगाट ने संन्यास लेने का ऐलान कर दिया. उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दी है. विनेश फोगाट ने कहा कि मां कुश्ती मेरे से जीत गई, मैं हार गई माफ करना आपका सपना मेरी हिम्मत सब टूट चुके. इससे ज्यादा ताकत नहीं रही अब. अलविदा कुश्ती 2001-2024. उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि आप सबकी हमेशा ऋणी रहूंगी

  • गोल्डन ब्वॉय’ को मिला ‘सिल्वर’, पाकिस्तान के अरशद नदीम ने ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण

    गोल्डन ब्वॉय’ को मिला ‘सिल्वर’, पाकिस्तान के अरशद नदीम ने ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण

    चैम्पियन नीरज चोपड़ा पेरिस ओलंपिक की भालाफेंक स्पर्धा में रजत पदक जीतकर लगातार दो ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक और फील्ड खिलाड़ी बन गए लेकिन पाकिस्तान के अरशद नदीम ने ओलंपिक में नये रिकॉर्ड के साथ बाजी मार ली।

    26 वर्ष के नीरज का दूसरा थ्रो ही उनका एकमात्र वैध थ्रो रहा जिसमें उन्होंने 89 . 45 मीटर फेंका जो इस सत्र का उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो था। इसके अलावा उनके पांचों प्रयास फाउल रहे। उन्होंने तोक्यो में 87 . 58 मीटर के थ्रो के साथ पीला तमगा जीता था।

    वहीं नदीम ने नया ओलंपिक रिकॉर्ड बनाते हुए दूसरा थ्रो ही 92 . 97 मीटर का लगाया। उन्होंने छठा और आखिरी थ्रो 91 . 79 मीटर का लगाया।पाकिस्तान का 1992 बार्सीलोना ओलंपिक के बाद यह पहला ओलंपिक पदक है।

    इससे पहले दस मुकाबलों में नीरज ने हमेशा नदीम को हराया था। पिछला ओलंपिक रिकॉर्ड नॉर्वे के आंद्रियास टी के नाम था जिन्होंने 2008 में बीजिंग खेलों में 90 . 57 मीटर का थ्रो फेंका था।

    ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स 88 . 54 मीटर के थ्रो के साथ तीसरे स्थान पर रहे। नीरज लगातार दो ओलंपिक व्यक्तिगत स्पर्धा का पदक जीतने वाले तीसरे और ट्रैक और फील्ड के पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। उनसे पहले पहलवान सुशील कुमार (2008 और 2012) और बैडमिंटन खिलाड़ी पी वी सिंधू (2016 और 2021) यह कारनामा कर चुके हैं।

    नदीम को हांगझोउ एशियाई खेलों में नीरज से प्रतिस्पर्धा करनी थी लेकिन आखिरी मौके पर चोट के कारण उन्होंने नाम वापिस ले लिया। नीरज ने उन्हें 2018 एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में हराया था।

  • दिल्ली आबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी

    दिल्ली आबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली आबकारी पुलिस मामले से संबंधित मामलों में जमानत दे दी। अदालत ने अब समाप्त हो चुकी आबकारी नीति के संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांचे गए मामलों में सिसोदिया को नियमित जमानत दे दी। सिसोदिया 17 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे।न्यायमूर्ति बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने सिसोदिया को दो जमानतदारों के साथ 10 लाख रुपये का जमानत बांड भरने, अपना पासपोर्ट जमा करने और जांच अधिकारी के समक्ष सप्ताह में दो बार सोमवार और गुरुवार को पेश होने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि वह गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने का कोई प्रयास नहीं करेंगे। शीर्ष अदालत ने 6 अगस्त को मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।सीबीआई और ईडी ने तर्क दिया था कि याचिका विचारणीय नहीं है क्योंकि सिसोदिया को पहले ट्रायल कोर्ट जाना होगा। यह तीसरी बार था जब सिसोदिया ने जमानत के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। पिछले साल, 30 अक्टूबर को, शीर्ष अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था, लेकिन अगले छह से आठ महीनों में मुकदमा समाप्त होने में विफल रहने या कछुए की गति से आगे बढ़ने पर उन्हें अपनी जमानत याचिका को पुनर्जीवित करने की अनुमति देकर एक खिड़की खुली रखी थी।

    चूंकि छह महीने में मुकदमा शुरू नहीं हो सका, इसलिए सिसोदिया ने देरी के आधार पर जमानत मांगी, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने 21 मई को उनकी याचिका खारिज कर दी। उन्होंने जून में शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया जब ईडी ने एक अवकाश पीठ को बताया कि वह 3 जुलाई तक अपनी शिकायत (या आरोप पत्र) दायर करेगा। इस दलील को दर्ज करते हुए, अदालत ने याचिका के गुण-दोष पर विचार करने से इनकार कर दिया। पिछले महीने, सिसोदिया ने जमानत के लिए अपनी तीसरी याचिका दायर की, 21 मई के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दूसरी बार प्रयास किया।

  • बांग्लादेश में तख्ता पलट शेख हसीना ने छोड़ा देश

    बांग्लादेश में तख्ता पलट शेख हसीना ने छोड़ा देश

    नई दिल्ली। क्या हमारा पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश भी म्यांमार और पाकिस्तान की राह पर चल पड़ा है? या फिर चीन की चालबाजियों के आगे लोकतंत्र ने घुटने टेक दिए हैं। कई दिनों से बांग्लादेश में चल रहा आंदोलन अब उग्र हो चला है और हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा है। बेकाबू आंदोलनकारियों के आगे कानून-व्यवस्था ने लगभग दम तोड़ दिया है। राजधानी ढाका हुड़दंगियों के हवाले हो चुकी है और प्रधानमंत्री निवास में अराजकता के निशान चारों ओर दिखाई दे रहे हैं। गृहमंत्री का घर आग के हवाले हो चुका है और सत्ताधारी पार्टी के दफ्तर को जला दिया गया है। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश के निर्माता और शेख हसीना के पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की मूर्ति को भी तोड़ दिया है। प्रधानमंत्री शेख हसीना को कई दिनों पहले ही यह समझ आ गया था कि देश की कमान उनके हाथों से निकल चुकी है। सोमवार को वो अपना विदाई भाषण दे ही रहीं थीं कि अचानक आंदोलनकारी वहां पहुंच गए और हसीना को जान बचाकर भागना पड़ा।उधर, ढाका में सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने लोगों से शांति बहाली की अपील की है। बांग्लादेश अखबार प्रोथोम आलो के मुताबिक, प्रधानमंत्री शेख हसीना इस्तीफा देने के बाद बहन रेहाना संग मिलिट्री हेलीकॉप्टर से भारत के लिए रवाना हो गईं। बांग्लादेश में सेना बनाएगी अंतरिम सरकार सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने शेख हसीना के इस्तीफे की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि अब सेना अंतरिम सरकार बनाएगी। हम हालात काबू में ले आएंगे। भरोसा रखें । 300 की मौत और हजारों घायल बांग्लादेश पिछले एक महीने से हिंसा की आग में धधक रहा है। शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। हाईवे और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले छात्रों पर पुलिस गोली मारने के साथ में आंसू गैस के गोले छोड़ रही है। इसमें 300 से ज्यादा की जान गईं और हजारों घायल हुए। अनिश्चितकाल के लिए लगा कफ्र्यू हालात इतने खराब हैं कि पूरे देश में अनिश्चित काल के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है। बाजार, बैंक और कंपनियां बंद कर दी गईं। स्कूलों और कॉलेजों की छुट्टी कर दी गई। प्रदर्शन को दबाने के लिए देश में इंटरनेट सेवा पर पाबंदी लगा दी गई।हसीना की पार्टी के छह नेताओं की मॉब लिंचिंग प्रदर्शनकारियों ने नरसिंगडी जिले में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के छह कार्यकर्ताओं को मॉब लिंचिंग कर मार डाला। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर में प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकाला था, जिसे लेकर अवामी लीग के कार्यकर्ता नाराज हो गए थे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें चार प्रदर्शनकारी घायल हो गए। इस पर भड़के प्रदर्शनकारियों ने पलटवार किया। अवामी लीग के कार्यकर्ता डरकर एक मस्जिद में छिप गए, जहां से निकालकर उनको पीट-पीटकर मार डाला। शेख हसीना का इस्तीफा क्यों मांग रहे प्रदर्शनकारी? नौकरियों में आरक्षण को लेकर आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारी हिंसा और मौतों क लिए हसीना सरकार को जिम्मेदार मानते हैं। वहीं हसीना के विरोधी और मानवाधिकार समूहों ने उनकी सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। इसलिए शेख हसीना का इस्तीफा मांग रहे थे। हालांकि सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है। बांग्लादेश में प्रदर्शन कब और क्यों शुरू हुए? बांग्लादेश में सरकार ने साल 2018 में अलग-अलग समुदाय को मिलने वाला 56 प्रतिशत आरक्षण खत्म कर दिया था। इस साल 5 जून को ढाका हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को पलट दिया और दोबारा आरक्षण लागू कर दिया। इसके बाद पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए थे, जिनमें 150 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट के फैसले में परिवर्तन करते हुए आरक्षण की सीमा 56 प्रतिशत से कम कर 7प्रति कर दी। इसमें 5 प्रतिशत स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार को जो पहले 30प्रति था और 2 प्रतिशत एथनिक माइनॉरिटी, ट्रांसजेंडर और दिव्यांग के लिए तय कर दिया। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया और देश छोड़ दिया, जिससे उनका 15 साल का कार्यकाल समाप्त हो गया। उनके इस्तीफे के बाद कई सप्ताह तक सरकार विरोधी हिंसा हुई, जिसमें 300 से अधिक मौतें हुईं। 76 वर्षीय हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना सुरक्षित आश्रय में भाग गई हैं, हजारों प्रदर्शनकारियों ने ढाका में उनके आधिकारिक आवास, गणभवन पर धावा बोल दिया। बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वेकर-उज़-ज़मान ने घोषणा की कि एक अंतरिम सरकार सत्ता संभालेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सेना खड़ी हो जाएगी और छात्र प्रदर्शनकारियों पर घातक कार्रवाई की जांच का वादा किया। बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन बढऩे पर भीड़ ने ढाका में शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान की मूर्ति को तोड़ दिया।

    . गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर लैंड हुआ शेख हसीना का विमान

    बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना सी-130 परिवहन विमान से गाजियाबाद के हिंडन एयर बेस पर उतरीं। विमान को भारतीय वायु सेना के सी-17 और सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस विमान हैंगर के पास पार्क किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान के भारतीय वायु क्षेत्र में प्रवेश से लेकर गाजियाबाद में लैंडिंग तक विमान की गतिविधियों पर भारतीय वायु सेना द्वारा नजर रखी गई थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में रहने के बाद लंदन के लिए उड़ान भरेगी। यह तुरंत स्पष्ट नहीं है कि सैन्य परिवहन विमान उसे भारत से आगे ले जाएगा या वह एक अलग विमान से लंदन जाएगी। हालांकि ब्रिटेन ने बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के राजनीतिक शरण के अनुरोध को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सूत्रों के अनुसार शेख हसीना कुछ दिनों तक भारत में रुकेंगी। खबरों के मुताबिक वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शेख हसीना की अगवानी की। भारत ने ढाका के अनुरोध के बाद हसीना के विमान को भारतीय हवाई क्षेत्र से सुरक्षित मार्ग प्रदान करने का निर्णय लिया। नई दिल्ली ने ढाका के घटनाक्रम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालाँकि, सभी घटनाक्रमों पर बारीकी से नजऱ रखी जा रही है। इससे पहले, बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मान ने पुष्टि की थी कि शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है और एक अंतरिम सरकार बनेगी। क्या सेना की मिलीभगत थी? मामलों के जानकार प्रोफेसर स्वर्ण सिंह बताते हैं कि भारत को सीमाओं की निगरानी बढ़ानी होगी। साल 2011 में भी वहां विरोध प्रदर्शन हुए थे। तब प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना हटाना, देश को भारत की पपेट बनने से बचाना है जैसे नारे लगाए थे। ऐसे में कुछ महीने पहले जिस पार्टी ने 300 में से 204 सीटें जीतीं, उसकी नेता को एक विरोध प्रदर्शन के बाद इस तरह देश छोडना पड़े और फिर दो घंटे बाद ही सेना प्रमुख मीडिया के सामने बयान दें कि ये प्रदर्शनकारी नहीं, क्रांतिकारी हैं। साफ है कि इस आंदोलन के पीछे सेना की मिलीभगत थी।

     जो तानाशाही करेगा उसे देश छोड़कर भागना पड़ेगा : आप नेता संजय सिंह

    बांग्लादेश के हालात पर आम आदमी पार्टी की तरफ से प्रतिक्रिया आई है। आप नेता संजय सिंह ने कहा कि जो तानाशाही करेगा उसे देश छोड़कर भागना पड़ेगा। संजय सिंह ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि जो तानाशाही करेगा उसे देश छोड़कर भागना पड़ेगा। संजय सिंह ने अपने इस पोस्ट में किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन उनका इशारा बीजेपी और केंद्र सरकार की तरफ माना जा रहा है।

  • Jharkhand में हुआ बड़ा रेल हादसा, हावड़ा-मुंबई मेल के 18 डिब्बे हुए बेपटरी

    Jharkhand में हुआ बड़ा रेल हादसा, हावड़ा-मुंबई मेल के 18 डिब्बे हुए बेपटरी

    झारखंड के चक्रधरपुर में बड़ा रेल हादसा हो गया है। चक्रधरपुर रेल मंडल के बाराबंबो रेलवे स्टेशन के पास हावड़ा मुंबई मेल एक्सप्रेस एक्सीडेंट का शिकार हो गई है। इस हादसे में ट्रेन के 18 डिब्बे पटरी से उतर गए है। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हुई है और छह लोग घायल हुए है। एक्सीडेंट के बाद घटनास्थल पर इसके ऑपरेशन जारी है जिसके लिए एआरएम, एडीआरएम और सीकेपी की टीम मौजूद है।

    अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन हादसा सुबह पौने चार बजे दक्षिण-पूर्व रेलवे (एसईआर) के चक्रधरपुर डिवीजन के अंतर्गत जमशेदपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर बड़ाबम्बू के पास हुआ है। एसईआर के प्रवक्ता ओम प्रकाश चरण ने बताया कि पास में एक मालगाड़ी भी पटरी से उतरी है। हालांकि अब तक ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि दोनों दुर्घटनाएं एक साथ हुई हैं या अलग अलग।

    दुर्घटनास्थल पर मौजूद पश्चिम सिंहभूम जिले के उपायुक्त कुलदीप चौधरी ने कहा, ‘‘बड़ाबम्बूके पास हावड़ा-मुंबई मेल के 18 डिब्बे पटरी से उतर गए, जिससे दो लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य लोग घायल हो गए। बचाव अभियान जारी है। एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की एक टीम मौके पर पहुंच रही है।’’ दुर्घटनास्थल पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों की सीमा के पास है। एसईआर प्रवक्ता ने कहा, ‘‘तड़के पौने चार बजे 22 डिब्बों वाली मुंबई-हावड़ा मेल के कम से कम 18 डिब्बे एसईआर की चक्रधरपुर डिवीजन के अंतर्गत बड़ाबम्बू रेलवे स्टेशन के पास पटरी से उतर गए। इन डिब्बों में 16 यात्री डिब्बे, एक पावर कार और एक पैंट्री कार शामिल है।’’

    एसईआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘दुर्घटना में घायल यात्रियों को बड़ाबम्बू में चिकित्सा सहायता प्रदान करने के बाद बेहतर इलाज के लिए चक्रधरपुर ले जाया गया।’’ अधिकारी के मुताबिक, बचाव अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेन सोमवार रात हावड़ा से रवाना हुई थी और मंगलवार तड़के बड़ाबम्बू रेलवे स्टेशन के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। स्थानीय प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि रेल दुर्घटना सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां ब्लॉक के पोटोबेड़ा में हुई।

    उन्होंने कहा, ‘‘मुंबई-हावड़ा मेल और एक मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई। अधिकारी प्रभावित यात्रियों की संख्या के बारे में पता लगा रहे हैं।’’ अधिकारी के अनुसार, दुर्घटना के मद्देनजर एसईआर ने मंगलवार को कुछ यात्री और एक्सप्रेस ट्रेन रद्द कर दीं, जिनमें 22861 हावड़ा-टिटलागढ़-कांतबांजी इस्पात एक्सप्रेस और 12021 हावड़ा-बारबिल जनशताब्दी एक्सप्रेस शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बड़ाबम्बू स्टेशन के पास हुई दुर्घटना के कारण कुछ अन्य ट्रेन की यात्रा या तो गंतव्य स्टेशन से पहले समाप्त कर दी गई है या फिर उनके मार्ग में बदलाव किया गया है। एसईआर ने एक बयान में बताया कि हादसे के बाद मुंबई, भुसावल, नागपुर, टाटा, चक्रधरपुर, राउरकेला, झारसुगुड़ा, हावड़ा, शालीमार और खड़गपुर के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।

  • गुदड़ी के लाल जैसे थे प्रभात झा

    गुदड़ी के लाल जैसे थे प्रभात झा

    स्मृति शेष
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    प्रभात झा का असमय जाना खल गया। प्रभात झा से प्रभात जी होने का एक लंबा सफर है और संयोग से मैं इस सफर का हमराही भी हूँ और चश्मदीद भी। प्रभात मेरी दृष्टि में सचमुच गुदड़ी के लाल थे। प्रभात 1980 में ग्वालियर में उस समय आये थे जब भाजपा का जन्म हुआ ही था । वे बिहार में दरभंगा जिले के हरिहरपुर गांव के रहने वाले थे । उनके पिता एक सामान्य परिवार के मुखिया थे। ग्वालियर में प्रभात का शैक्षणिक ,सामाजिक और राजनीयतिक जीवन जब शुरू हो रहा था तब मेरी पत्रकारिता की गाड़ी चल पड़ी थी। प्रभात को दो जून भोजन की व्यवस्था भाजपा ग्वालियर के सम्भवत:पहले अध्यक्ष रूप किशोर सिंघल के यहां से करा दी गयी थी।
    प्रभात में बचपन से भी श्रमजीवी होने के लक्षण थे । वे भाजपा की महाराज बाड़ा पर होने वाली आम सभाओं केलिए फर्श बिछवाने से लेकर नेताओं के आने तक मंच पर अकेले भाषण देने का काम बाखूबी करने लगे थे। भाजपा का कार्यालय मुख्रजीभवन बना तो वे कार्यालय में आ गये । यहीं एक छोटे से कक्ष में प्रभात झा ने उगना शुरू किया। वे परिश्रमी थे,जिद्दी थे और मिलनसार भी ,इसीलिए स्थानीय भाजपा नेताओं में अल्प समय में ही लोकप्रिय हो गए। उन्हें पितृवत संरक्षण दिया तत्कालीन भाजपा नेता भाऊ साहब पोतनीस ने। पोतनीस जी ग्वालियर के महापौर भी रहे। उन्होंने विधानसभा का चुनाव भी लड़ा और प्रभात झा उनके लिए अविराम काम करते रहे।
    लिखने-पढ़ने में प्रभात की अभिरुचियों को देखते हुए संघ ने उन्हें अपने मुखपत्र दैनिक स्वदेश में बुला लिया । वे अब दोहरी भूमिका में थे । एक पत्रकार के रूप में भी और भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में भी। हम दोनों हमउम्र थे और सत्ताप्रतिष्ठान के प्रति मुखर रहने वाले भी इसलिए हमारी निकटता मित्रता में कब तब्दीलहो गयी ,हमें पता ही नहीं चला।मुझसे दो साल बड़े प्रभात ने मुझे कभी मेरे नाम से नहीं बुलाया । मै उनके लिए अचल ही बना रहा। प्रभात के जीवन का वो फकीराना जीवन था । सुबह का नाश्ता कहाँ होगा ,दोपहर का भोजन कहाँ और रात्रि का भोजन कहाँ प्रभात खुद नहीं जानते थे। हमारे यहां एक कहावत है कि – जहाँ मिली दो ,वहीं गए सो ‘ ये कहावत उन दिनों प्रभात झा पर पूरी तरह लागू होती थी।
    पार्टी के लिए वे निशियाम काम करते थे, पार्टी कार्यकर्ताओं की मदद के लिए वे किसी भी समय ,किसी भी अधिकारी या नेता के घर जा धमकते थे। उन्हें किसी की भी मदद करने में कोई संकोच नहीं था ,ये वो दिन थे जब प्रभात पैदल राजनीति और पत्रकारिता दोनों करते थे । बहुत दिनों बाद उनके पास जमाने की सबसे लोकप्रिय लेकिन सस्ती मानी जाने वाली मोपेड लूना आयी। उसमें पेट्रोल कब ,कहां खत्म हो जाये ये कोई नहीं जानता था। जहाँ पेट्रोल खत्म वहीं लूना को खड़ा कर प्रभात किसी और के साथ लड़कर निकल जाते थे। कोई न कोई शुभचिंतक बाद में लूना में पेट्रोल डलवाकर मुखर्जी भवन के नीचे टिका आता था। प्रभात कुछ ही वर्षों में शहर के लिए एक चिर-परिचित नाम बन गए थे।
    प्रभात अपने पिता से मिलने जब भी मुंबई या बिहार जाते तो मेरे लिए कुछ न कुछ उपहार जरूर लाते थे। उनके यहां रेडीमेड वस्त्रों का काम भी होता था शायद। इसलिए वे मेरे लिए शर्ट अवश्य लाते थे। प्रभात को गरीबी का अहसास ही नहीं अनुभव भी था इसीलिए वे गरीबों के प्रति हमेशा उदार रहते थे। वे जिसके खिलाफ खड़े होते तो पीछे नहीं हटे और जिसके साथ खड़े होते तो कभी साथ नहीं छोड़ते। उनके ये ही गुण उनके भविष्य की आधारशिला बने। भाजपा के तबके शीर्ष नेता कुशाभाऊ ठाकरे के लिए प्रभात झा सबसे भरोसे के कार्यकर्ता थे। उनका यही विश्वास प्रभात को ग्वालियर से भोपाल ले गया ।
    प्रभात को ग्वालियर ने पहचान दी ,परिवार दिया ,बच्चे दिए और प्यार दिया । वे पोतनीस का बड़ा के स्थानीय निवासी बन गए ,लेकिन उन्होंने कभी अपने परिवार को कभी अपनी सीमाओं से बाहर नहीं निकलने दिया। वे जब पार्टी के कार्यालय सचिव बनकर भोपाल आये तो मेरे भोपाल प्रवास का आश्रय उनका कार्यालय का कमरा ही होता था। वे हर समय हड़बड़ी में रहते थे। प्रेस से पार्टी के रिश्ते बनाने में प्रभात ने जो मेहनत की वैसी मेहनत मेरी नजर में अभी तक भाजपा का कोई मीडिया प्रमुख नहीं कर पाया। रूठों को मानाने में उन्हें महारत हासिल थी। मेरा उनसे अनेक अवसरों पर मतभेद भी हुआ लेकिन इस मतभेद ने खाई का रूप कभी नहीं लिया । हमारी उनकी दूरियां उनके राज्य सभा जाने के बाद बढ़ीं।
    राज्य सभा सदस्य प्रभात झा और मेरे पत्रकार मित्र प्रभात झा में जमीन-आसमान का अंतर आ गया था । वे बाद में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी बने ,लेकिन वे लगातार बदलते गए। वे जिस गरीबी से लड़ते हुए आगे बढ़े थे उसे उन्होंने भुला दिया था। वे सामंतवाद के मुखर विरोधी थे लेकिन राजमाता विजयाराजे सिंधिया के लिए सदैव समर्पित रहते थे ,उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के साथ भी सौजन्य निभाया लेकिन उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ तब तक मोर्चा खोले रखा जब तक कि ज्योतिरादित्य खुद भाजपा में शामिल नहीं हो गए। सिंधिया ने हमेशा दरियादिली दिखाई और वे प्रभात कि पुराने आचरण को भूलकर उनसे मिलते-जुलते रहे।
    प्रभात झा का अपना कोई जनाधार नहीं था ,वे पार्टी कि जनाधार पर ही आगे बढ़े। आज के मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर उस जमाने में पार्षद होते थे और प्रभात झा पत्रकार। प्रभात झा ने सियासत में जिस तरह से छलांग लगाईं थी उससे पार्टी कि भीतर और बाहर उनके जितने समर्थक थे उतने ही विरोधी भी। एक समय ऐसा आया की प्रभात झा मेरे पड़ौस में रहने आ गए। वे उन दिनों प्रदेश के अध्यक्ष थे । उनके यहां लगने वाली भीड़ से हमारी कालोनी कि लोग दुखी हो गए। उनके यहां सभी वर्गों के लोग तोहफे लेकर आते थे। प्रभात को कोशिश होती थी की वे सब मेरी नजरों में न आएं ,क्योंकि एक मै ही था जो उनसे किसी भी मुद्दे पर अपनी सहमति या असहमति जता सकता था। वे अक्सर मुझे स्वतंत्रता दिवस पर अपने घर ध्वजारोहण कि लिए बुलाते थे ,लेकिन मेरी उपस्थिति उन्हें बाद में बाधक लगने लगी और वे अपना कार्यालय पार्क होटल से हटा ले गए।
    प्रभात झा को जीवन में वो सब कुछ हासिल हुआ जिसके वे तलबगार थे। उनका एक ही सपना अधूरा रह गया और वो ये था कि वे अपने बेटे को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी कि रूप में स्थापित नहीं कर पाए। उनके बेटे आत्मनिर्भर हैं ,उन्होंने अपनी और से कोशिश भी की किन्तु राजनीति शायद उनके नसीब में नहीं थी। प्रभात और नरेंद्र सिंह तोमर के बीच अपने अपने पुत्रों को राजनीति में स्थापित करने की एक अघोषित प्रतिस्पर्द्धा रही। प्रभात झा अच्छे वक्ता थे,अच्छे लेखक थे ,अच्छे पाठक भी थे। लेकिन एक अराजक जीवन जीने की उनकी कमजोरी ने उन्हें तमाम शारीरिक व्याधियां भी दे दीं और यही व्याधियां उनके लिए घातक साबित हुईं। हाल के कुछ वर्षों में उनके लगातार आग्रह के बावजूद मई उनके घर नहीं गया। उन्होंने जब दिल्ली में घर बनाया तब भी और जब ग्वालियर में घर बनाया तब भी। पता नहीं क्यों मै जिस प्रभात झा का हमराही था वो प्रभात मुझे कहीं नदारत मिला। आज मुझे अपने फैसले पर अफ़सोस भी होता है। ग्वालियर ने प्रभात को जितना दिया वे उसका शतांश भी ग्वालियर को लौटा नहीं पाए। इसका खेद शायद उन्हें भी रहा होगा। अब वे नहीं हैं ,उनकी यादें हैं। मेरी अपने मित्र रहे प्रभात झा को विनम्र श्रृद्धांजलि।
    राकेश अचल
  • भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रभात झा का निधन

    भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रभात झा का निधन

    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष रहे प्रभात झा का आज सुबह निधन हो गया। उनका गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था।

    भोपाल के बंसल अस्पताल में चल रहा था इलाज
    मेदांता से पहले उनको एमपी के राजधानी भोपाल स्थित बंसल अस्पताल में एडमिट कराया गया था। जिसके दो दिन बाद झा को एयरलिफ्ट कर दिल्ली के मेदांता अस्पताल में लाया गया।

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि
    भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, वरिष्ठ नेता आदरणीय श्री प्रभात झा जी के निधन का अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ। बाबा महाकाल दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें एवं शोकाकुल परिजनों को इस भीषण वज्र पात को सहने की शक्ति दें। म ध्यप्रदेश के विकास में आपकी म हत्वपूर्ण भूमिका सदैव हमे प्रेरित करेगी। आपका निधन राजनैति क जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।ॐ शांति!

    मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री तुलसी राम सिलावट ने एक्स पर लिखते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भाज पा के पूर्व अध्यक्ष,वरिष्ठ भाजपा नेता आदरणीय श्री प्रभात झा जी के निधन का अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ। ईश्वर दिवंग त आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें एवं शोकाकुल परिजनों को इस भीषण वज्रपात को सह ने की शक्ति दें।
    पार्टी में रहे कई महत्वपूर्ण पदों पर

    प्रभात झा पेशे से एक पत्रकार थे। बाद में वह राजनीति में आ गए। भाजपा में कई पदों पर रहे। वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी नियुक्त हुए थे, पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष भी रहे।

    67 वर्षीय झा लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके बेटे अयत्न ने निधन की जानकारी देते हुए कहा कि अंतिम संस्कार ग्वालियर या पैतृक गांव कोरियाही, सीतामढ़ी (बिहार) में होगा।

  • प्रदूषण एक महामारी

    प्रदूषण एक महामारी

    चिकित्सा विज्ञान से जुड़ी चर्चित अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका लासेंट के हाल के अध्ययन में वायु प्रदूषण की बढ़ती विनाशकारी स्थितियों के आंकड़े न केवल चौंकाने वाले है बल्कि अत्यंत चिन्तातनक है। भारत के दस बड़े शहरों में हर दिन होने वाली मौतों में सात फीसदी से अधिक का मुख्य कारण हवा में व्याप्त प्रदूषण है। वहीं दुनिया में सबसे प्रदूषित राजधानी दिल्ली में यह आंकड़ा साढ़े ग्यारह प्रतिशत है। भारत के महानगरों में वायु प्रदूषण के रूप में पसर रही मौत के लिये सरकार एवं उनसे संबंधित एजेंसियों की लापरवाही एवं कोताही शर्मनाक है, क्योंकि सरकार द्वारा 131 शहरों को आवंटित धनराशि का महज 60 फीसदी ही खर्च किया जाता है। गंभीर से गंभीरतर होती वायु प्रदूषण की स्थितियों के बावजूद समस्या के समाधान में कोताही चिन्ता में डाल रही है एवं आम जनजीवन के स्वास्थ्य को चौपट कर रही है। महानगरों में प्रदूषण का ऐसा विकराल जाल है जिसमें मनुष्य सहित सारे जीव-जंतु फंसकर छटपटा रहे हैं, जीवन सांसों पर छाये संकट से जूझ रहे हैं।केंद्र सरकार ने वायु प्रदूषण एवं हवा में घुलते जहरीले तत्वों की चुनौती के मुकाबले के लिये राष्ट्रीय वायु स्वच्छता कार्यक्रम के क्रियान्वयन की घोषणा 2019 में की थी। जिसका मकसद था कि खराब हवा के कारण नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले घातक प्रभाव को कम किया जा सके। सरकार की कोशिश थी कि देश के चुनिंदा एक सौ तीस शहरों में वर्ष 2017 के मुकाबले वर्ष 2024 तक घातक धूल कणों की उपस्थिति को बीस से तीस फीसदी कम किया जा सके। लेकिन विडम्बना है कि तय लक्ष्य हासिल नहीं हो सके। महानगरों-नगरों को रहने लायक बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकारों की नहीं है, बल्कि हम सबकी है।वायु प्रदूषण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से खतरनाक होने लगती है। महानगरों की हवा में उच्च सांद्रता है, जो बच्चों को सांस की बीमारी और हृदय रोगों की तरफ धकेल रही है। शोध एवं अध्ययन में यह भी पाया गया है कि दिल्ली जैसे महानगरों में रहने वाले 75.4 फीसदी बच्चों को घुटन महसूस होती है। 24.2 फीसदी बच्चों की आंखों में खुजली की शिकायत होती है। सर्दियों में बच्चों को खांसी की शिकायत भी होती है। बुजुर्गों का स्वास्थ्य तो बहुत ज्यादा प्रभावित होता ही है। हवा में कैडमियम और आर्सेनिक की मात्रा में वृद्धि से कैंसर, गुर्दे की समस्या और उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। 300 से अधिक एक्यूआई वाले शहरों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी सहित अनेक महानगर क्षेत्र में रहने वाले सांस के रूप में जहर खींचने को क्यों विवश है, इसके कारणों पर इतनी बार चर्चा हो चुकी है कि उन्हें दोहराने की आवश्यकता नहीं। निस्संदेह, राज्यों के शासन व स्थानीय प्रशासन के वायु प्रदूषण को लेकर उदासीन रवैये से नागरिकों के जीवन का संकट बरकरार है। सर्वविदित तथ्य है कि न तो सरकारों के पास पर्याप्त संसाधन हैं और न ही ऐसा विशिष्ट कार्यबल। नागरिकों की जागरूकता व जवाबदेही बढ़ाकर वायु प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सकता है। इस विषम एवं ज्वलंत समस्या से मुक्ति के लिये प्रशासन एवं सरकारों को संवेदनशील एवं अन्तर्दृष्टि-सम्पन्न बनना होगा।

  • अखिलेश यादव का बड़ा आरोप, अयोध्या में बाहरी लोगों को जमीन बेची गई, अरबों रुपये का घोटाला हुआ

    अखिलेश यादव का बड़ा आरोप, अयोध्या में बाहरी लोगों को जमीन बेची गई, अरबों रुपये का घोटाला हुआ

    समाजवादी पार्टी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को अयोध्या में बाहरी लोगों को जमीन की कथित बिक्री को लेकर भाजपा सरकार पर हमला किया और अरबों रुपये के भूमि घोटाले का दावा किया। उन्होंने इन भूमि सौदों की गहन जांच की भी मांग की। उन्होंने एक एक्स पोस्ट में लिखा कि जैसे-जैसे अयोध्या की ज़मीन के सौदों का भंडाफोड़ हो रहा है, उससे ये सच सामने आ रहा है कि भाजपा राज में अयोध्या के बाहर के लोगों ने मुनाफ़ा कमाने के लिए बड़े स्तर पर ज़मीन की ख़रीद-फ़रोख़्त की है। सपा नेना ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा पिछले 7 सालों से सर्किल रेट न बढ़ाना, स्थानीय लोगों के ख़िलाफ़ एक आर्थिक षड्यंत्र है। इसकी वजह से अरबों रुपये के भूमि घोटाले हुए हैं। यहाँ आस्थावानों ने नहीं बल्कि भू-माफ़ियाओं ने ज़मीनें ख़रीदी हैं। उन्होंने कहा कि इन सबसे अयोध्या-फ़ैज़ाबाद और आसपास के क्षेत्र में रहनेवालों को इसका कोई भी लाभ नहीं मिला। ग़रीबों और किसानों से औने-पौने दाम पर ज़मीन लेना, एक तरह से ज़मीन हड़पना है। हम अयोध्या में तथाकथित विकास के नाम पर हुई ‘धांधली’ और भूमि सौदों की गहन जाँच और समीक्षा की माँग करते हैं।वहीं, इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा था कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को उसी तरह हराएगी, जैसे उसने हालिया लोकसभा चुनाव में अयोध्या में उसे हराया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने अहमदाबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। गांधी ने कहा, ‘‘उन्होंने (भाजपा ने) हमें धमकाकर और हमारे कार्यालय को नुकसान पहुंचाकर हमें चुनौती दी है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि हम सब मिलकर उनकी सरकार को उसी तरह तोड़ देंगे जैसे उन्होंने हमारे कार्यालय को नुकसान पहुंचाया है। यह लिखकर ले लीजिए कि कांग्रेस गुजरात में चुनाव लड़ेगी और नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा को गुजरात में हराएगी, जैसा हमने अयोध्या में किया था।’’

  • घात लगाकर पाकिस्तानी आतंकवादियों ने सेना के ट्रकों पर ग्रेनेड फेंके, 4 जवान शहीद

    घात लगाकर पाकिस्तानी आतंकवादियों ने सेना के ट्रकों पर ग्रेनेड फेंके, 4 जवान शहीद

    सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सोमवार को सेना के वाहनों पर हमला पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किया गया था, जिन्होंने अधिकतम हताहतों के लिए अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया। आतंकवादियों ने स्थानीय समर्थकों की मदद से संभवतः इलाके की टोह भी ली, जिससे एक योजनाबद्ध लक्षित हमले का संकेत मिलता है। सूत्रों के अनुसार, उन्नत हथियारों में एम4 कार्बाइन राइफलें और विस्फोटक उपकरण तथा अन्य गोला-बारूद शामिल थे। सूत्रों ने बताया कि बदनोटा गांव, जहां हमला हुआ, में उचित सड़क संपर्क का अभाव है, और वाहन 10-15 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से नहीं चल सकते। आतंकवादियों ने स्पष्ट रूप से इलाके का फायदा उठाया, क्योंकि सेना के वाहन बहुत धीमी गति से चल रहे थे। सूत्रों ने  बताया, “2-3 आतंकवादी और 1-2 स्थानीय गाइड पहाड़ियों के ऊपर पोजिशन ले चुके थे। आतंकवादियों ने पहले सेना के वाहनों पर ग्रेनेड फेंके और फिर उन पर गोलीबारी की। पिछले आतंकवादी हमलों की तरह, पहला लक्ष्य चालक था।” प्राथमिक जांच में यह भी पाया गया कि आतंकवादियों ने हमले से पहले इलाके की टोह ली थी।सूत्रों ने आगे बताया, “एक स्थानीय गाइड ने आतंकवादियों को इलाके की टोह लेने में मदद की और उन्हें भोजन और आश्रय भी मुहैया कराया। हमले के बाद, उसने उन्हें उनके ठिकानों तक पहुंचने में मदद की।”आतंकवादियों का पता लगाने के लिए मंगलवार को कठुआ में व्यापक तलाशी अभियान जारी रहा, माना जा रहा है कि हमलावर पास के जंगल क्षेत्रों में भाग गए हैं। हालांकि, पहाड़ी इलाके, कोहरा और घनी वनस्पति तलाशी अभियान में बड़ी बाधा बन गई है।आतंकवादियों ने दोपहर करीब साढ़े तीन बजे कठुआ शहर से करीब 150 किलोमीटर दूर लोहाई मल्हार में बदनोता गांव के पास मचेड़ी-किंडली-मल्हार मार्ग पर सेना के ट्रक को निशाना बनाया। हमले में मारे गए पांच कर्मियों में एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) भी शामिल है। पांच अन्य सैनिक घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। जम्मू क्षेत्र में एक महीने में हुए इस पांचवें आतंकी हमले की व्यापक निंदा की गई है।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के जवानों की मौत पर शोक व्यक्त किया और जोर देकर कहा कि सैनिक क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।उन्होंने लिखा मैं बदनोटा, कठुआ (जम्मू-कश्मीर) में हुए आतंकवादी हमले में हमारे पांच बहादुर भारतीय सेना के जवानों की मौत पर बहुत दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इस कठिन समय में राष्ट्र उनके साथ मजबूती से खड़ा है। आतंकवाद विरोधी अभियान चल रहे हैं और हमारे सैनिक क्षेत्र में शांति और व्यवस्था कायम करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। मैं इस नृशंस आतंकवादी हमले में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, “हमारी सेना पर ये कायरतापूर्ण हमले बेहद निंदनीय हैं।” उन्होंने कहा एक महीने के भीतर पांचवां आतंकवादी हमला देश की सुरक्षा और हमारे सैनिकों के जीवन के लिए एक गंभीर झटका है। इन लगातार आतंकवादी हमलों का समाधान खोखले भाषणों और झूठे वादों से नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई से होगा। हम दुख की इस घड़ी में देश के साथ मजबूती से खड़े हैं।कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व मुख्यमंत्रियों – नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और गुलाम नबी आजाद – ने जानमाल के नुकसान पर शोक व्यक्त किया और क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त की।