नई दिल्ली । राहुल गांधी ने रविवार को सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा. राहुल गांधी ने 2 पन्नों के लंबे पत्र में सीएम योगी से मुआवजे की राशि को बढ़ाने की मांग की. उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार ने जो मुआवजे की राशि तय की है वो अपर्याप्त है. मुआवजे की राशि को बढ़ाना चाहिए और इसको जल्द से जल्द पीडि़त परिवारों को देना चाहिए.उत्तर प्रदेश के हाथरस में 2 जुलाई को एक सत्संग के दौरान भगदड़ मच गई थी. इस हादसे में 121 लोगों की मौत हो गई. घटना पर जमकर सियासत भी हो रही है. सूबे की बीजेपी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. इस बीच, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है. उन्होंने सीएम योगी से मुआवजे की राशि को बढ़ाने और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है. राहुल गांधी का पत्र 2 पन्नों का है. उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार ने जो मुआवजे की राशि तय की है वो अपर्याप्त है. मुआवजे की राशि को बढ़ाना चाहिए और इसको जल्द से जल्द पीडि़त परिवारों को देना चाहिए. साथ ही उन्होंने लिखा कि घायलों का जल्द से जल्द उचित इलाज कराया जाना चाहिए और उन्हें भी उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए. राहुल गांधी ने हाथरस का किया दौरा राहुल गांधी ने पत्र में यह भी कहा कि लोगों को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. इससे पहले राहुल गांधी ने शुक्रवार को हाथरस का दौरा किया था और पीडि़तों से मुलाकात की. अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने पत्र में कहा हाथरस में भगदड़ हादसे से प्रभावित पीडि़त परिवारों से मुलाकात कर, उनका दुख महसूस कर और समस्याएं जान कर मेरे पास कहने को कोई शब्द नहीं थे. भोले बाबा के खिलाफ मामला दर्ज 2 जुलाई को हाथरस में हुए इस हादसे के बाद अब तक मुख्य आरोपी देव प्रकाश मधुकर को शुक्रवार रात गिरफ्तार कर लिया गया था. जिसके बाद आज यानी 7 जुलाई को हाथरस भगदड़ मामले में भोले बाबा, जिनका मूल नाम सूरज पाल सिंह है, के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. भोले बाबा के खिलाफ मामला पटना के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दायर किया गया है. मायावती और अखिलेश यादव क्या बोले? हादसे पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अगर हाथरस में हुई भगदड़ की घटना में प्रशासनिक चूक से सबक नहीं लिया गया तो भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं और होंगी. अखिलेश यादव ने अरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार भगदड़ की घटना में मामूली गिरफ्तारियां करके अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है.वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने गरीबों, दलितों और पीडि़तों को शनिवार को सलाह दी कि वे गरीबी और अन्य सभी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए हाथरस के भोले बाबा जैसे व्यक्तियों के पाखंड से गुमराह न हों. मायावती ने कहा कि हाथरस कांड में भोले बाबा सहित जो भी दोषी हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसे अन्य स्वयंभू बाबाओं के विरुद्ध भी कार्रवाई जरूरी है.
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Delhi Airrport की छत नहीं हमारी साख गिरी है
हम विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में आगे बढ़ने का दावा कर रहे हैं, हम यह भी दावा कर रहे हैं कि हमारे कई शहर जल्द ही स्मार्ट सिटी बनने जा रहे हैं लेकिन हकीकत क्या है यह कुछ तस्वीरों के माध्यम से ही समझ आ सकता है। मानसून के इस मौसम में हमारे बड़े महानगरों ही नहीं छोटे शहरों तक में दिखता बदहाली का आलम हमारी सरकारों की ओर से किये जाने वाले विकास के तमाम दावों पर सवालिया निशान लगा रहा है। सवाल उठ रहा है कि मानसून से पहले ‘सारी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं’, का दावा करने वाली राज्य सरकारें और नगर निगम क्यों हर साल सोये रहते हैं? राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई से बारिश के मौसम में हर साल जो तस्वीरें सामने आती हैं वह राज्य सरकारों और नगर निगमों की नाकामी का ही परिणाम है। मानसून में ऐसा लगता है कि हमारे महानगर स्मार्ट सिटी नहीं तालाब सिटी हैं।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पहली ही बारिश में आम आदमी परेशान नहीं हुआ है बल्कि सांसदों तक को अपने घरों के अंदर जाने और घर से बाहर आने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की छत का एक हिस्सा ढहने और वहां एक मृत्यु होने की खबर इस समय अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में भी आ गयी है। यह घटना जितनी दुखद है उतनी ही शर्मसार कर देने वाली भी है क्योंकि हवाई अड्डे की देखरेख और सुरक्षा के लिए इतना भारी अमला तैनात रहने के बावजूद सवाल उठता है कि कैसे किसी का ध्यान छत की हालत पर पहले नहीं गया? देखा जाये तो हवाई अड्डे की छत नहीं बल्कि हमारी साख गिरी है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने घटनास्थल का दौरा कर लिया, हादसे की जांच के आदेश दे दिये, मृतक के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान कर दिया, लेकिन क्या इतना ही काफी है? जिस जीएमआर कंपनी का यह निर्माण बताया जा रहा है क्या उसके किसी अधिकारी की गिरफ्तारी होगी? क्या उस पर कोई मुकदमा चलाया जायेगा? भविष्य में ऐसा हादसा दोबारा नहीं होगा क्या इसकी कोई गारंटी देगा? अगर इन सब सवालों का जवाब नहीं में है तो सरकारों को जनता को बड़े-बड़े सपने दिखाना बंद कर देना चाहिए।बहरहाल, दिल्ली में विभिन्न मार्गों पर जिस तरह ट्रैफिक जाम लगा हुआ है, मेट्रो स्टेशनों पर पानी भरने की खबरें आ रही हैं, लोगों के घरों में पानी भर जाने से सामान को क्षति पहुँची है और रेल-हवाई यातायात थम गया है उससे आम जनता को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली सरकार और नगर निगम को चाहिए कि वह अपनी नाकामियों का दोष दूसरों पर मढ़ने या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझने की बजाय अपने अधिकारियों को ग्राउण्ड जीरो पर उतार कर हालात को जल्द से जल्द सामान्य करवाने का प्रयास करे।
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भारत में हो रही भीषण गर्मी के बीच जनता झेल रही दोहरी मार, लगातार दाल और सब्जी के बढ़ रहे दाम
भारत में खाद्य मुद्रास्फीति सालाना आधार पर लगभग 8% बनी हुई है। देश में ये स्थिति नवंबर 2023 से लगातार बनी हुई है। देश में मानसून के समय से पहले आगमन और सामान्य से अधिक वर्षा के पूर्वानुमान के बावजूद इसमें शीघ्र कोई कमी आने की संभावना नहीं है। इसके कारण, मुख्य मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 4% के लक्ष्य से ऊपर है।
जानें खाद्य मुद्रास्फीति के बढ़ने के पीछे कारण
भारत में भीषण गर्मी के कारण दालों, सब्जियों और अनाजों जैसे खाद्य पदार्थों की आपूर्ति में काफी कमी आई है, इतना अधिक कि खाद्य पदार्थों के निर्यात पर प्रतिबंध और आयात पर शुल्क कम करने का भी कोई खास असर नहीं हुआ है। गर्मी के महीनों में सब्जियों की आपूर्ति में आमतौर पर कमी आ जाती है, लेकिन इस वर्ष गिरावट बहुत अधिक है, क्योंकि देश के लगभग आधे हिस्से में तापमान सामान्य से 4-9 डिग्री सेल्सियस अधिक है।क्या मॉनसून में कम हो सकती हैं कीमतें
मानसून की प्रारंभिक गति शीघ्र ही समाप्त हो गई और इसके परिणामस्वरूप इस मौसम में अब तक 18% वर्षा कम हुई है। कमजोर मानसून के कारण गर्मियों में बोई जाने वाली फसलों की बुआई में भी देरी हुई है, जो पर्याप्त बारिश के साथ ही पूरी गति से हो सकती है। मौसम विभाग ने मानसून के बाकी मौसम में औसत से अधिक बारिश का अनुमान लगाया है।कबतक कम होंगी कीमतें
अगर मानसून फिर से एक्टिव होता है और सामान्य कार्यक्रम के अनुसार पूरे देश में छा जाता है तो अगस्त से सब्जियों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, आपूर्ति कम होने के कारण दूध, अनाज और दालों की कीमतों में कमी आने की संभावना नहीं है। चावल की कीमतें बढ़ सकती हैं क्योंकि सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 5.4% की वृद्धि की है। चीनी की कीमतें ऊंची रहने की संभावना है क्योंकि अगले सीजन में उत्पादन में गिरावट की उम्मीद है। -

HC द्वारा Arvind Kejriwal को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने लगाई जमानत पर रोक, अभी नहीं होंगे रिहा
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दी गई जमानत को चुनौती देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और उसे सफलता भी मिल गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर रोक लगा दी है। यानी अब अरविंद केजरीवाल तिहाड़ जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। इस आदेश के साथ ही अरविंद केजरीवाल की रिहाई पर रोक लग गई है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अरविंद केजरीवाल को दी गई ज़मानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति जताई है। उच्च न्यायालय ने कहा कि जब तक वह मामले की समीक्षा नहीं कर लेता, तब तक निचली अदालत के आदेश को लागू नहीं किया जाएगा।
इससे पहले निचली अदालत ने गुरुवार रात आप प्रमुख को राहत प्रदान की थी। इसके साथ ही निचली अदालत ने जमानत आदेश को 48 घंटे तक स्थगित रखने की ईडी की याचिका को खारिज कर दिया था।
दिल्ली के मुख्यमंत्री तिहाड़ जेल में बंद हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। ईडी इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर सकता है। 21 मार्च को गिरफ्तार किए गए केजरीवाल को पिछले महीने लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। उन्होंने 2 जून को आत्मसमर्पण कर दिया था।
ईडी ने पेश किए थे सबूत
गुरुवार की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू ने दावा किया कि उनकी जांच ठोस सबूतों पर आधारित है। उन्होंने उल्लेख किया कि अदालत में पेश किए गए करेंसी नोटों की तस्वीरें रिश्वत और गोवा के एक आलीशान होटल में केजरीवाल के ठहरने से जुड़ी थीं। राजू ने दावा किया कि विनोद चौहान ने चनप्रीत सिंह और अन्य को भुगतान के निर्देश दिए थे, जिसकी तस्वीरें चौहान के फोन पर पाई गई थीं। उन्होंने कहा कि चौहान, जो नियमित रूप से चनप्रीत से संवाद करता था, के केजरीवाल के साथ घनिष्ठ संबंध थे।
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सिंगर अलका याग्निक को हुआ रेयर सेंसरी न्यूरल नर्व हियरिंग लॉस, क्या होती है ये बीमारी
बॉलीवुड की मशहूर सिंगर अलका याग्निक एक बीमारी का शिकार हो गई हैं. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी दी है. अलका ने कहा है कि उनको कान से संबंधित समस्या हो गई है. इस वजह से उनको कुछ सुनने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. फिलहाल वह इस बीमारी से रिकवर कर रही हैं. अलका ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा है कि उनको वायरल अटैक के बाद यह समस्या हुई है.
डॉक्टरों ने अलका में रेयर सेंसरी न्यूरल नर्व हियरिंग लॉस की बीमारी का पता लगाया है. आइए जानते हैं कि ये बीमारी क्या होती है. रेयर सेंसरी न्यूरल नर्व हियरिंग लॉस एक ऐसी समस्या है जिससे मरीज को कुछ भी सुन्ने में परेशानी होती है. कान के अंदर के हिस्से या कोक्लीअ में मौजूद सेल्स में किसी प्रकार की क्षति के कारण यह समस्या होती है. यह कान से संबंधित एक आम समस्या है. इसमें कान से ब्रेन तक आवाज को पहुंचाने वाले नर्व की सेल्स डैमेज हो जाती हैं. इस वजह से रेयर सेंसरी नर्व हियरिंग लॉस होता. इस परेशानी की वजह से अचानक से भी कुछ भी सुनना बंद हो जाता है.
क्यों होती है ये बीमारी
दिल्ली में ईएनटी और एलर्जी विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण राजभर Tv9 से बातचीत में बताते हैं कि ओटोटॉक्सिक दवा के कारण भी यह समस्या हो जाती है. इसके अलावा अगर सिर में कोई चोट लगती है तो इससे भी कान की नसों को नुकसान हो सकता है. कुछ मामलों में किसी वायरस और मेनिएर्स बीमारी के कारण भी ऐसा हो जाता है. इस बीमारी की पहचान के लिए डॉ. सुनने की क्षमता की जांच करता है. उससे पता चलता है कि मरीज को कितना सुन रहा है और आवाज पर मरीज का कैसा रिस्पांस आ रहा है.डॉ कृष्ण बताते हैं कि यह बीमारी खतरनाक नहीं है और आसानी से इसका इलाज किया जा सकता है. एक ऑडियोलॉजिस्ट इस बीमारी प्रकार और डिग्री का पता लगाने के लिए टेस्ट करता है. इससे पता लगाया जाता है कि सुन्ने की क्षमता कितनी कम हुई है. उसके हिसाब से आगे का ट्रीटमेंट किया जाता है. 45 वर्ष की आयु के बाद ईएनटी डॉक्टर द्वारा समय पर कान की जांच करने से जल्दी निदान करने में मदद मिलती है.
क्या होते हैं लक्षण
बातचीत सुनने और समझने में परेशानी होना
एक कान से दूसरे की अपेक्षा बेहतर सुनाई देना
कानों में भिनभिनाहट या घंटियाँ बजने जैसी आवाजें (टिनिटस)
कैसे करें बचाव
अगर आप तेज़ आवाज़ वाले स्थान पर हैं तो कान को कवर रखें
संगीत सुनने के लिए हियरिंग एम्प्लीफायर या ईयरबड पहनते समय सावधानी बरते
अपनी सुनने की क्षमता की नियमित जांच करवाएं
कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें
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खालिस्तानी आतंकी निज्जर के लिए कनाडा का प्रेम बेनकाब, संसद में रखा गया 2 मिनट का मौन
कनाडा का आतंकियों के प्रति सहानुभूति वाला चेहरा एक बार फिर पर्दाफाश हुआ है. कनाडा की संसद ने खालिस्तानी आतंकी और अलग राष्ट्र की मांग करने वाले हरदीप सिंह निज्जर के लिए दो मिनट का मौन रखकर उसे श्रद्धांजलि दी. पिछले साल कनाडा में उसकी हत्या कर दी गई थी. इससे पहले कनाडा ने एक नाजी लीडर को भी सम्मानित किया था.
कनाडाई संसद ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की पहली बरसी पर मौन रखकर उसे श्रद्धांजलि दी है. कनाडाई संसद ने यह शर्मनाक हरकत तब की है जब 23 जून को कनिष्क विमान हादसे के 39 साल पूरे हो रहे हैं. भारत ने हरदीप सिंह निज्जर को अपने यहां आतंकी घोषित किया था.
पिछले साल कर दी गई थी हत्या
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की पिछले साल 18 जून को एक गुरुद्वारे की पार्किंग में हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. हरदीप सिंह कनाडा के वैंकूवर शहर स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारा का अध्यक्ष भी था.हरदीप सिंह निज्जर खालिस्तान आंदोलन से जुड़ा भारतीय मूल का एक कनाडाई सिख अलगाववादी नेता था. भारत सरकार की ओर से उसे आतंकवादी घोषित किया गया था. वह आतंकवादी संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स से जुड़ा हुआ था.
अलग राष्ट्र के लिए चलाया था अभियान
अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर पंजाब के जालंधर के भार सिंह पुरा गांव का रहने वाला था. 1990 के दशक के मध्य में निज्जर कनाडा चला गया और वह वहीं से भारत विरोधी अभियान चलाता रहा. निज्जर खालिस्तान टाइगर फोर्स का प्रमुख था और वह फोर्स के सदस्यों के संचालन, नेटवर्किंग, ट्रेनिंग और वित्तीय मदद दिया करता था. यह संगठन अलग खालिस्तानी राष्ट्र की मांग करता रहा है.निज्जर ने अलग खालिस्तान राष्ट्र के लिए “सिख रेफरेंडम 2020” के रूप में ऑनलाइन अभियान चलाया था और इस वजह से एक मामले में साल 2020 में पंजाब में उसकी संपत्ति कुर्क कर दी गई थी. वह सिख फॉर जस्टिस (Sikhs for Justice) से भी जुड़ा हुआ था.
कनिष्क हादसे की 39वीं बरसी
कनाडा भारत विरोधी और अलगाववादी नेताओं का समर्थन करता रहा है. पिछले साल सितंबर में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत का दौरा किया था और वह यहां जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आए थे. भारत का दौरा करने के बाद उन्होंने 18 सितंबर को कनाडाई संसद में बयान दिया था कि निज्जर की हत्या के पीछे “भारत सरकार की संभावित संलिप्तता के आरोपों” की जांच की जा रही है. इस बयान पर भारत की ओर से सख्त प्रतिक्रिया की गई थी.इस साल मई के शुरुआती हफ्ते प्रधानमंत्री ट्रूडो ने फिर निज्जर की हत्या मामले में भारत के संबंधों का जिक्र किया था जिस पर भारत सरकार की ओर से आपत्ति जताई गई थी.कनाडा संसद की ओर से निज्जर को ऐसे समय में श्रद्धांजलि दी गई है जब 23 जून को कनिष्क हादसा की 39वीं बरसी मनाई जा रही है. 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (कनिष्क) पर उड़ान के दौरान आतंकवादी हमला कर दिया गया था जिसमें 86 बच्चों सहित 329 निर्दोष लोगों की मौत हो गई. इस वीभत्स घटना की रविवार को 39वीं बरसी है.
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गडकरी और हरदीप सिंह पुरी के मंत्रालयों पर टीडीपी की नजर?
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ लेने के बाद आज अपना कार्यभार संभाला और अब मंत्री पद बंटवारा विभाग बंटवारा करना है । मंत्रिमंडल के शपथ लेने के बाद अब सरकार में विभागों के आवंटन पर सबकी नजर है। सरकार के कई ऐसे विभाग हैं जिसपर उसके सहयोगी दल टीडीपी की नजर है। बुनियादी ढांचे से जुड़े मंत्रालयों पर टीडीपी की नजर दरअसल, आंध्र प्रदेश के बापटला निर्वाचन क्षेत्र से तेलुगु देशम पार्टी टीडीपी के एक सांसद ने इस बात का जिक्र किया है कि चंद्रबाबू के नेतृत्व वाली पार्टी बुनियादी ढांचे से जुड़े मंत्रालयों पर नजर गड़ाए हुए है। हाल ही में टीडीपी के दो सांसदों राम मोहन नायडू और चंद्रशेखर पेम्मासानी ने पीएम मोदी की 71 सदस्यीय कैबिनेट में शपथ ली। गडकरी और पुरी के मंत्रालयों पर नजर टीडीपी नेता के बयान की माने तो पार्टी की नजर पूर्व में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय संभाल रहे नितिन गडकरी के विभाग के साथ-साथ हरदीप सिंह पुरी को मोदी 2.0 में मिले शहरी विकास मंत्रालय पर हो सकती है। नए शपथ लेने वाले मंत्रियों को विभागों का आवंटन जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। पहली कैबिनेट बैठक के बाद ही इसपर फैसला हो सकता है। टीडीपी सांसद ने कही ये बात एएनआई से बात करते हुए, टीडीपी सांसद कृष्ण प्रसाद ने आंध्र प्रदेश के लिए बुनियादी ढांचे के महत्व पर जोर दिया, जो 2014 में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के विभाजन के बाद अस्तित्व में आया था। प्रसाद ने पोलावरम सिंचाई परियोजना और अमरावती को महानगर के रूप में विकसित करने के साथ-साथ राज्य की हजार किलोमीटर लंबी तटरेखा पर बंदरगाहों के निर्माण जैसी प्रमुख परियोजनाओं पर भी ध्यान खींचा। बुनियादी ढांचे का विकास महत्वपूर्ण टीडीपी सांसद ने जोर देकर कहा कि अगले पांच वर्षों में राज्य की प्रगति के लिए बुनियादी ढांचे का विकास महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार के गठन और एनडीए के गठबंधन की प्रशंसा करते हुए भविष्यवाणी की कि देश की आर्थिक वृद्धि में तेजी आएगी, जिसका लक्ष्य पांच वर्षों के भीतर भारत को पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से तीसरे स्थान पर पहुंचाना है।
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शिवराज को कृषि, खट्टर के पास ऊर्जा, राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्रालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार पीएम पद की शपथ ले ली और कैबिनेट की पहली बैठक आज हुई। इसमें मोदी सरकार 3.0 के मंत्रालयों का ऐलान किया गया है। नितिन गडकरी को एक बाऱ फिर से सड़क परिवहन मंत्री बरकरार रखा गया है। अजय टम्टा और हर्ष मल्होत्रा को राज्य मंत्री बनाया गया है। मनोहर लाल खट्टर को पावर मिनिस्ट्री दी गई है। उनके साथ श्रीपद नाईक राज्य मंत्री बनाया गया है। अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्ट्री भी खट्टर के पास रहेगी। इसमें उनके साथ तोखन साहू राज्य मंत्री के रूप में रहेंगे। शिवराज सिंह चौहान को कृषि मंत्रालय दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें पंचायती राज मंत्रालय भी दिया गया है। सीआर पाटिल को जल शक्ति मंत्रालय दिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री बनाया गया है। अन्नपूर्णा देवी को वुमन एंड चाइल्ड डेवलमेंट, अश्विनी वैष्णव को रेल के अलावा सूचना प्रसारण मंत्री मिला है। रवनीत सिंह बिट्टू को एमओएस माइनॉरिटी अफेयर्स मिला है। गजेंद्र शेखावत को संस्कृति और टूरिज्म मंत्रालय मिला है। उनके साथ सुरेश गोपी और राव इंद्रजीत सिंह को राज्य मंत्री बनाया गया है। किरेन रिजिजू को संसदीय कार्य मंत्री बनाया गया है। भूपेंद्र यादव को पर्यावरण मंत्रालय मिला है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को दूरसंचार मंत्री बनाया गया है। हरदीप पुरी को पेट्रोलियम मंत्रालय मिला है। जेपी नड्डा को स्वास्थ्य मंत्रालय मिला है। पीयूष गोयल को वाणिज्य मंत्रालय मिला है। गिरिराज सिंह को टेक्सटाइल मिनिस्ट्री दी गई है।
सीसीएस में कोई बदलाव नहीं
राजनाथ सिंह के पास रक्षा मंत्रालय वापस से रहेगा। जीतन राम मांझी को एमएसएमई मंत्रालय मिला है। अमित शाह गृह मंत्री बने रहेंगे। निर्मला सीतारमण वित्त मंत्री बनीं रहेंगी। एस जयशंकर के पास विदेश मंत्रालय रहेगा। सीसीएस सुरक्षा के मामलों पर निर्णय देने वाली देश की सर्वोच्च संस्था होती है। प्रधानमंत्री इस कमेटी के अध्यक्ष हैं और गृह मंत्री, वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री इसके सदस्य। देश की सुरक्षा संबंधी सभी मुद्दों से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय कैबिनेट ऑन सिक्योरिटी का ही होता है। इसके अलावा कानून एवं व्यवस्ता और आंतरिक सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर भी सीसीएस ही अंतिम निर्णय लेता है।
सहयोगियों को मिला ये पद
चिराग पासवान को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय मिला है। एचडी कुमारस्वामी को स्टील मंत्रालय दिया गया है। टीडीपी के राममोहन नायडू को सिविल एविएशन मंत्रालय मिला है।
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राम मंदिर, 370 जैसे वादे पूरे, फिर क्यों बहुमत से पिछड़ी भाजपा
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने जारी हैं। रुझानों के स्थिर होने के बाद अब जो तस्वीर सामने आ रही है, उसके मुताबिक भाजपा को इस चुनाव में बड़ा नुकसान हुआ है। पार्टी इस बार अपने दम पर 272 सीटों यानी बहुमत के जादुई आंकड़े को भी पार नहीं कर पा रही है। हालांकि, एनडीए को इस चुनाव में 290 से 300 सीटों के बीच मिलती दिख रही हैं। उधर इंडिया गठबंधन ने सभी अनुमानों को धता बताते हुए करीब 230 से 240 सीटों पर जबरदस्त बढ़त हासिल की। इस बीच सवाल यह है कि आखिर बीते दो लोकसभा चुनावों में मजबूत प्रदर्शन, बीते पांच साल के कार्यकाल में राम मंदिर और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का वादा पूरा करने के बावजूद आखिर क्यों इस बार भाजपा को आम चुनाव में बहुमत नहीं मिला। साथ ही एक कौतूहल इस बात पर भी है कि आखिर तमाम एग्जिट पोल और अनुमानों के बावजूद इंडिया गठबंधन ने अपने प्रदर्शन को कैसे बेहतर किया। आइये जानते हैं…
1. क्षेत्रीय दलों के दम से घटीं भाजपा की सीटें
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने जीत हासिल की है। मजेदार बात यह है कि जहां एनडीए गठबंधन में भाजपा सबसे बड़ी और मुख्य पार्टी रही। वहीं, इंडी गठबंधन में कांग्रेस के नेतृत्व के बावजूद इससे जुड़े क्षेत्रीय दल अपने राज्यों में काफी मजबूत रहे। जहां एनडीए में सिर्फ दो क्षेत्रीय दल- आंध्र प्रदेश में तेदेपा (16 सीट) और बिहार में जदयू (12 सीट), लोजपा (5 सीट) और महाराष्ट्र में शिवसेना (7 सीटें) ही अपने दम पर भाजपा से अलग पहचान कायम रखने में सफल हुईं। दूसरी तरफ, इंडी गठबंधन की तरफ से तमिलनाडु में द्रमुक को 20 से ज्यादा सीटें और टीएमसी को करीब 30 सीटें हासिल हुई हैं। इसके अलावा समाजवादी पार्टी ने यूपी में करीब 40 सीटें, आम आदमी पार्टी ने पंजाब में 3, माकपा को चार, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब) को 9 सीटें, राकांपा-एसपी को 7 सीटें और राजद को 4 सीटें मिलती दिख रही हैं। इसके अलावा कई अन्य छोटे दल भी इंडी गठबंधन के साथ रहे, जिनकी छिटपुट सीटों से इंडी गठबंधन को जबरदस्त फायदा हुआ।
3. एक होकर चुनाव लड़ने का असर
इंडी गठबंधन ने जहां कई बड़ी-छोटी पार्टियों को साथ लाकर भाजपा के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार किया। दूसरी तरफ अपने नेतृत्व का एलान न कर के भी इंडी गठबंधन ने न सिर्फ खुद को टूटने से बचाए रखा, बल्कि अलग-अलग पार्टियों के नेताओं को एक मंच पर आवाज बुलंद करने का बराबर का मौका दिया। ऐसे में सत्तासीन एनडीए गठबंधन ने कई मौकों पर नेतृत्व की कमी को लेकर इंडी गठबंधन पर निशाना साधा। खासकर भाजपा ने इसे ‘पांच साल में पांच प्रधानमंत्री/हर एक साल में देश का एक पीएम’ का फॉर्मूला बताते हुए हुए खिचड़ी गठबंधन करार दे दिया।
4. अलग-अलग लड़कर भी बाद में साथ आने का विश्वास
इंडी गठबंधन के मंच पर तो सारे विपक्षी दल के बड़े चेहरे एक साथ दिखे, वहीं कुछ राज्यों में इनके बीच कोई एकजुटता नहीं दिखी। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सीटें साझा करने का फॉर्मूला निकाल लिया। दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने भी इंडी गठबंधन की बैठकों में हिस्सा लिया। लेकिन पंजाब में यही दोनों पार्टियों अलग-अलग उतरीं। इसके बावजूद चुनाव में दोनों ही पार्टियों को कुल-मिलाकर फायदा ही हुआ। कुछ यही हाल इंडी गठबंधन की बैठकों में साथ दिखने वाली कांग्रेस और लेफ्ट पार्टी के गठजोड़ का भी हुआ। दोनों ही दल जहां केंद्र में तो साथ लड़ने का आह्वान करते रहे, वहीं बंगाल और केरल में दोनों ही दल आपस में मुकाबला करते नजर आए।दूसरी तरफ इंडी गठबंधन के सूत्रधार मानी जा रहीं ममता बनर्जी ने बंगाल में कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर एकमत न होने की बात कहते हुए अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया। बंगाल में भाजपा को एकतरफा तौर पर हराने के बाद टीएमसी का यह फैसला भी सही साबित हुआ है।
5. तीन प्रमुख राज्यों में प्रदर्शन
लोकसभा चुनाव के रुझानों/नतीजों पर गौर किया जाए तो एनडीए को सीटों के लिहाज से तीन सबसे राज्य- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भारी नुकसान हुआ है। जहां उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में भाजपा को 33 सीटें मिलती दिख रही हैं, तो वहीं महाराष्ट्र में पार्टी को 10 सीटें आ रही हैं। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में भी पार्टी को 12 सीटें मिलती दिख रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 2019 में भाजपा को यूपी में 62 सीटें मिली थीं। वहीं, महाराष्ट्र में पार्टी को 23 और बंगाल में भाजपा ने 18 सीटें हासिल की थीं। इस बार इन तीनों राज्यों में ही भाजपा नीत एनडीए को बड़ा नुकसान हुआ है।
6. हिंदी पट्टी में सीटें घटने से हुआ नुकसान
इतना ही नहीं हिंदी पट्टी की बात करें तो भाजपा को काफी नुकसान उठाना पड़ा। जहां यूपी में पार्टी के प्रदर्शन में गिरावट आई, वहीं हरियाणा में भाजपा को 2019 की 10 सीटों के मुकाबले इस बार सिर्फ छह सीटों पर ही बढ़त मिल पाई। इसके अलावा राजस्थान में जहां पिछली बार भाजपा को 24 सीटें मिली थीं, तो वहीं इस बार पार्टी को 14 सीटें ही मिल पाईं। बिहार में 2019 में भाजपा को 15 सीटें मिली थीं तो इस बार वह 12 सीटों पर ही रह गई। झारखंड में भी भाजपा ने पिछली बार 11 सीटें हासिल की थीं तो वहीं यहां भी उसकी सीट घटकर आठ रह गई हैं।
कई मुद्दों पर अस्पष्ट रुख, पिछले वादों पर ज्यादा भरोसा
इस लोकसभा चुनाव में एक और बड़ा मुद्दा भाजपा का कई मामलों में अस्पष्ट होना भी रहा। खासकर पिछले कुछ महीनों में पार्टी ने बेरोजगारी, महंगाई और अन्य कई मुद्दों पर गोलमोल जवाब दिए। इतना ही नहीं जातिगत जनगणना, मराठा आरक्षण, चुनावी बॉन्ड, कृषि कानून, एलएसी पर चीन से टकराव और नई न्याय संहिता के कई मुद्दों पर भी पार्टी ने बीच-बचाव करते हुए ही बयान जारी किए। ऐसे में देश से जुड़े इन अहम मुद्दों पर भाजपा का अस्पष्ट रुख उसे महंगा पड़ गया।
राम मंदिर-अनुच्छेद 370 के अलावा नए वादों की कमी
भाजपा के लिए 2019 में दो बड़े वादे- अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की कोशिशें जारी रखना और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के प्रयासों ने जनता को अपनी तरफ खींचा था। हालांकि, इस बार पार्टी अपने इन्हीं दो वादों को पूरा करने के नाम पर वोट मांगती नजर आई। यहां तक कि भाजपा के घोषणापत्र में भी इस बार नए वादों की काफी कमी देखी गई। पार्टी ने अधिकतर वही वादे दोहराए, जिन्हें वह पहले कई मौकों पर आगे बढ़ाने की बात कह चुकी है। ऐसे में नए वादों की कमी के चलते वोटरों का ध्यान उन पार्टियों की ओर गया, जिन्होंने नए वादों को प्राथमिकता दी। -

सरकार बनाने की जोड़तोड़ शुरू, टीडीपी-जेडीयू से बात करेगी कांग्रेस
लोकसभा चुनाव 2024 नतीजे आने शुरू हो गए हैं. एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर देखी जा रही है. इस बीच रुझानों से उत्साहित कांग्रेस टीडीपी और जेडीयू से बात करने जा रही है. अभी तक के रूझान में टीडीपी और जेडीयू बड़ी बढ़त बनाए हुई है. माना जा रहा है कि अगर रुझान परिणाम में बदले तो इंडिया गठबंधन एनडीए को कमजोर कर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है. लोकसभा चुनाव की 543 सीटों के रुझान इंडिया गठबंधन के लिए उत्साहित करने वाले हैं. अभी तक एनडीए 289 सीटों पर बढ़त बनाए है, जबकि इंडिया गठबंधन कांटे की टक्कर देता हुआ 233 सीटों पर आगे चल रहा है. 21 सीटें ऐसी हैं जो अन्य के खाते में जाती दिखाई दे रही हैं. ऐसे में इंडिया गठबंधनकॉन्फिडेंस में है. माना जा रहा है कि यदि यह रुझान परिणाम में बदले तो इंडिया गठबंधन खुद को और मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा. इसके लिए उसे सबसे ज्यादा जरूरत जदयू और टीडीपी की होगी.
