अजनबी न्यूज इंदौर। शनिवार की वह दोपहर एक परिवार के लिए कभी न भूलने वाला काला दिन बन गई। इंदौर-खंडवा रोड पर सेल सिटी के सामने जब एक पिता अपने काम में व्यस्त था, तब नियति ने उसके 4 साल के मासूम बेटे को उससे हमेशा के लिए छीन लिया। सिमरोल थाना क्षेत्र में एक चलती कार देखते ही देखते आग का गोला बन गई, जिसमें मासूम चिराग जिंदा जल गया।

खेलते-खेलते मौत की आगोश में समा गया बचपन
पेशे से मैकेनिक संजय बढ़िया शनिवार दोपहर करीब 12 बजे अपने बेटे चिराग को साथ लेकर काम पर निकले थे। वे सड़क किनारे एक डीजे वाली गाड़ी को सुधारने में मशगूल थे और छोटा चिराग पास ही खड़ी स्विफ्ट कार में बैठा खेल रहा था। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि अगले ही पल क्या होने वाला है।
अचानक कार से धुंआ उठा और देखते ही देखते भीषण लपटों ने पूरी गाड़ी को घेर लिया। पिता संजय और आसपास के लोग चीखते हुए कार की ओर दौड़े, लेकिन आग इतनी विकराल थी कि कार के दरवाजे और सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम जाम हो गए।
बेबस पिता और जलती कार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार के भीतर फंसे मासूम को बचाने के लिए पिता और स्थानीय लोगों ने पत्थर मारकर शीशे तोड़े, लेकिन तब तक आग कार के भीतर तक फैल चुकी थी। जब तक मासूम को बाहर निकाला गया, वह पूरी तरह झुलस चुका था। मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल की टीम भी बेबस नजर आई; चिराग की सांसें थम चुकी थीं।
शॉर्ट सर्किट बना काल!
सिमरोल थाना प्रभारी कुलदीप खत्री के अनुसार, प्राथमिक जांच में आग लगने का कारण कार में शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है। पुलिस ने मामले की बारीकी से जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस तकनीकी चूक ने एक हंसते-खेलते घर का ‘चिराग’ हमेशा के लिए बुझा दिया।
अजनबी की कलम से: > यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हर माता-पिता के लिए एक चेतावनी भी है। पुरानी कहावत है कि ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’, लेकिन यहाँ तो चंद पलों की बेरुखी ने एक पिता की गोद सूनी कर दी। ईश्वर मासूम की आत्मा को शांति और परिवार को यह असह्य दुख सहने की शक्ति दे।


