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HC द्वारा Arvind Kejriwal को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने लगाई जमानत पर रोक, अभी नहीं होंगे रिहा

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दी गई जमानत को चुनौती देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और उसे सफलता भी मिल गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर रोक लगा दी है। यानी अब अरविंद केजरीवाल तिहाड़ जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। इस आदेश के साथ ही अरविंद केजरीवाल की रिहाई पर रोक लग गई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अरविंद केजरीवाल को दी गई ज़मानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति जताई है। उच्च न्यायालय ने कहा कि जब तक वह मामले की समीक्षा नहीं कर लेता, तब तक निचली अदालत के आदेश को लागू नहीं किया जाएगा।

इससे पहले निचली अदालत ने गुरुवार रात आप प्रमुख को राहत प्रदान की थी। इसके साथ ही निचली अदालत ने जमानत आदेश को 48 घंटे तक स्थगित रखने की ईडी की याचिका को खारिज कर दिया था।

दिल्ली के मुख्यमंत्री तिहाड़ जेल में बंद हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। ईडी इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर सकता है। 21 मार्च को गिरफ्तार किए गए केजरीवाल को पिछले महीने लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। उन्होंने 2 जून को आत्मसमर्पण कर दिया था।

 

ईडी ने पेश किए थे सबूत

गुरुवार की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू ने दावा किया कि उनकी जांच ठोस सबूतों पर आधारित है। उन्होंने उल्लेख किया कि अदालत में पेश किए गए करेंसी नोटों की तस्वीरें रिश्वत और गोवा के एक आलीशान होटल में केजरीवाल के ठहरने से जुड़ी थीं। राजू ने दावा किया कि विनोद चौहान ने चनप्रीत सिंह और अन्य को भुगतान के निर्देश दिए थे, जिसकी तस्वीरें चौहान के फोन पर पाई गई थीं। उन्होंने कहा कि चौहान, जो नियमित रूप से चनप्रीत से संवाद करता था, के केजरीवाल के साथ घनिष्ठ संबंध थे।