अजनबी न्यूज जयपुर। कहते हैं कि दुनिया में अगर कोई बिना किसी शर्त के बेपनाह मोहब्बत करता है, तो वो सिर्फ एक मां होती है। नौ महीने कोख में पालने से लेकर, हर सांस के साथ बच्चे की लंबी उम्र की दुआ मांगने वाली मां को क्या पता था कि जिस बेटी को उसने बड़े लाड़-प्यार से पाला, वही एक दिन उसकी जान की दुश्मन बन जाएगी। जयपुर से आई एक रूह कंपा देने वाली दास्तान ने न सिर्फ रिश्तों को शर्मसार किया है, बल्कि इंसानियत को भी तार-तार कर दिया है।
दौलत और रुतबे की अंधी चाहत
23 साल की आयुषी शर्मा, जो खुद कानून (LLB) की पढ़ाई कर रही है और समाज को इंसाफ दिलाने की राह पर थी, उसने कानून और नैतिकता दोनों को पैरों तले कुचल दिया। परिवार में पैसों की कोई कमी नहीं थी। करोड़ों की जमीन-जायदाद और एक रसूखदार बैकग्राउंड होने के बावजूद, आयुषी की आंखों पर लालच का ऐसा चश्मा चढ़ा कि उसे अपनी मां की ममता दिखाई देना बंद हो गई।
कुछ महीने पहले पिता (जो राजस्थान हाईकोर्ट में क्लर्क थे) के निधन के बाद, उनकी जगह अनुकंपा के आधार पर मां को सरकारी नौकरी मिली। बस यही बात इस पढ़ी-लिखी बेटी के दिल में कांटे की तरह चुभने लगी। खुद मेहनत करके मुकाम हासिल करने के बजाय, उसे मां की वो नौकरी अपनी जागीर लगने लगी। उसे लगा कि अगर मां रास्ते से हट जाए, तो यह नौकरी उसे आसानी से मिल जाएगी।

ताऊ के साथ मिलकर रची खौफनाक साजिश
अपनी सगी मां को मौत के घाट उतारने के लिए इस कलयुगी बेटी ने अपनों को ही मोहरा बनाया। उसने अपने ताऊ को हाईवे किनारे की करोड़ों की जमीन का लालच देकर इस खौफनाक खेल में शामिल किया। ममता का सौदा महज 7 लाख रुपये में तय हुआ। पेशेवर कातिलों को सुपारी दी गई और एक ऐसा प्लान तैयार किया गया जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर दे।
स्कॉर्पियो के पहियों तले कुचली गई ‘मां की ममता’
एक सुबह जब मां रोज की तरह अपनी जिंदगी और बच्चों के भविष्य को संवारने निकली, तो उसे अंदाजा भी नहीं था कि काल बनकर आ रही स्कॉर्पियो को उसकी अपनी ही बेटी ने भेजा है। तेज रफ्तार गाड़ी ने मां को बेरहमी से कुचल दिया। तड़पती हुई मां की चीखें भी उस बेटी के दिल को नहीं पिघला पाईं, जिसने कभी उसी मां की उंगली पकड़कर चलना सीखा था।


