
– चिकित्सा के क्षेत्र में नर्सेस की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है
– मेडिकल कॉलेज में धूमधाम से मनाया गया नर्सेज डे
शिवपुरी। श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में अधिष्ठाता डॉ. के. बी.वर्मा, अधीक्षक डॉक्टर आशुतोष चौऋषि , डॉक्टर पंकज शर्मा, अस्पताल प्रबंधक डॉ विकास त्यागी, उप रजिस्ट्रार डॉक्टर उर्वशी मारवाह, उप प्रबंधक डॉक्टर शुभांगी सिंह, सहायक पी आर ओ राहुल अष्ठाना सहित स्टाफ कार्यक्रम में मौजूद रहे।
इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अधिष्ठाता डॉ. के. बी.वर्मा ने सभी को नर्सेस दिवस की बधाई देते हुए कहा कि
आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल में नर्सों की महत्वपूर्ण भूमिका की ओर नीति निर्माताओं और जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय नर्स परिषद ने 12 मई 1974 को पहला अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया। तब से, यह हर साल चिकित्सा जगत में मनाया जाता है। यह फ्लोरेंस नाइटिंगेल को श्रद्धांजलि है, जिन्हें आधुनिक नर्सिंग का दार्शनिक भी माना जाता है।

साथ ही डॉ. के. बी.वर्मा ने यह भी कहा कि नर्सों के काम की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। आज उनके साहस और निष्ठा प्रयाण कर्तव्य की प्रशंसा करने का दिन है। भारत में नर्सों के साहस की सराहना न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर चुके हैं, बल्कि हाल ही में डब्ल्यूएचओ ने भी इसे सराहा है। इंजेक्शन लगाने से लेकर, मरहम-पट्टी आदि की जिम्मेदारी सिस्टरों के सिर होती है। हालांकि नर्सिंग क्षेत्र में पुरुष स्टाफ भी हैं, लेकिन महिलाओं के मुकाबले काफी कम हैं। कमी के दो मूल कारण हैं। अव्वल, महिला नर्स में मरीजों को ममता की करुणा दिखती हैं। दूसरा, वह अपनी ड्यूटी को जिम्मेदारी से निभाती हैं। यही कारण है नर्सों को अच्छे से प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वह मरीजों को मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और चिकित्सकीय तौर पर मदद कर सकें।
विशिष्ठ अतिथि अधीक्षक डॉक्टर आशुतोष चौऋषि ने स्वास्थ्य विभाग में नर्सेस की अहम भूमिका एंव सहयोग की सराहना की। साथ ही कोरोना काल में भयानक स्थिति होने के बावजूद नर्सों की पूरी ईमानदारी, तत्परता व लगन के साथ कार्य करने की सराहना की। अस्पताल अधीक्षक ने यह भी कहा कि नर्सिंग प्रोफेशन स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ है।
इसी के साथअस्पताल प्रबंधक डॉ विकास त्यागी ने भी स्टाफ नर्सेस के होसले को बढ़ाते हुए कहा कि सामान्य दिनों के मुकाबले कोविड काल में पूरे संसार ने नर्सों के योगदान को करीब से देखा था। वो ऐसा वक्त जब संक्रमितों के नजदीक जाने मात्र से लोग कतराते थे। तब, नर्सें ही मरीजों की देखरेख में लगी थीं।
कार्यक्रम संचालक शीना थामस, प्रियंका शुक्ला, मेरी अंजिता, ईरम सुल्ताना एवं सरस्वती वंदना – पूजा, उषा, बबिता सहित नृत्य – शिवाली, सपना, रुबी, ज्योति, ग्रुप एवं कविता – प्रीति साहू द्वारा प्रस्तुत की गई । कार्यक्रम में डांस, नर्सों के जीवन और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को चित्रित करने वाला मार्मिक काव्य पाठ और कोविड-19 जैसी महामारी के चुनौतीपूर्ण समय के दौरान नर्सों के उल्लेखनीय योगदान को दर्शाने वाला एक भावपूर्ण नाटक प्रस्तुत किया गया। मैट्रन शीना थॉमस ने स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में नर्सों की अपरिहार्य भूमिका पर जोर देते हुए आभार व्यक्त किया। उप रजिस्ट्रार डॉ. उर्वशी मारवाह ने कहा कि नर्सों को उनकी अटूट प्रतिबद्धता और अमूल्य योगदान के लिए अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि उनका समर्पण, करुणा वास्तव में हमारे लिए प्रेरणादायक है।

