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व्हाइट कोट पेशेवरता, विश्वास और मरीजों की सेवा करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक: डीन डॉ डी.परमहंस

मेडिकल कॉलेज में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए व्हाइट कोट सेरेमनी का हुआ आयोजन

अजनबी न्यूज शिवपुरी। श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय शिवपुरी में शुक्रवार को मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित, पुष्प अर्पण कर व्हाइट कोट सेरेमनी का शुभारंभ मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉक्टर डी.परमहंस, अधीक्षक डॉक्टर आशुतोष चौऋषि ,को-ऑर्डिनेटर एमईयू डॉ. ईला गुजारिया, विभागाध्यक्ष डॉक्टर के. बी. वर्मा, सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ अनन्त राखोंडे ,कम्यूनिटी मेडिसिन विभागायध्यक्ष डॉ राजेश अहिरवार, विभागाध्यक्ष डॉक्टर अपराजिता तोमर द्वारा किया गया। मेडिकल कॉलेज में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए व्हाइट कोट सेरेमनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के समस्त विभाग अध्यक्षों,अन्य चिकित्सा शिक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं को व्हाइट कोट पहना कर प्रोत्साहित किया।

डीन डॉक्टर डी.परमहंस ने एमबीबीएस छात्र – छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि व्हाइट कोट प्रतीकात्मक संस्कार है। व्हाइट कोट नए छात्र-छात्राओं को चिकित्सा के क्षेत्र में शामिल करता है। चिकित्सा पेशे में मेहनत, समर्पण, करुणा और सहानुभूति की जरूरत होती है। आपने जो व्हाइट कोट पहना है यह बड़ी जिम्मेदारी है। साथ ही यह भी कहा कि अभी आप कच्चे घड़े हो आपको किस तरह किस सांचे में ढलना यह आपके ऊपर निर्भर करता है “ढलना” शब्द का मतलब सही ‘आकार लेना’ और ‘पकना’ है, संबोधित करते हुए यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स (National Task Force – NTF) का भी गठन किया गया है। राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की रोकथाम के लिए की गई है। इस टास्क फोर्स का उद्देश्य छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करना और उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या की घटनाओं को रोकना है। इसी के साथ अर्ली क्लीनिकल एक्सपोसर (ECE) प्रक्रिया के तहत आप नवागत छात्र- छात्राओं को उनकी पढ़ाई के शुरुआती दौर में ही अस्पताल जैसे क्लिनिकल माहौल में अनुभव मिलता है। यह अनुभव छात्रों को चिकित्सा की वास्तविकताओं से परिचित कराता है, उनके बुनियादी विज्ञान की शिक्षा को नैदानिक ​​संदर्भ प्रदान करता है। साथ ही यह भी कहा कि कॉलेज में शैक्षिक माहौल प्रदान करना उनकी जिम्मेदारी है। इसके लिए कॉलेज फैकल्टी प्रतिबद्ध है। चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के दौरान कई प्रकार के अनुभव आपको मिलेंगे।

इसके साथ ही को-ऑर्डिनेटर एमईयू मेडिकल डॉ. ईला गुजारिया ने कहा कि एमबीबीएस छात्र-छात्राएं जो व्हाइट कोट पहन रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि व्हाइट कोट क्यों पहना जाता है। इसका महत्व क्या है। इसे पहनकर चिकित्सक के पेशे को अपना लेना ही काफी नहीं है। व्हाइट कोट के पीछे बड़ी जिम्मेदारी छिपी हुई हैं। इन सारी जिम्मेदारियों का अहसास कराने के लिए ही मेडिकल कॉलेज में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए व्हाइट कोट सेरेमनी का आयोजन किया गया है। जिससे विद्यार्थी चिकित्सक के पेशे के ग्लैमर के साथ ही अपनी जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखें।व्हाइट कोट पहनकर मानवता की सेवा के लिए समर्पित मार्ग चुनना आपकी जिम्मेदारी है। इस दौरान उन्हें अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया। वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा अभिभावकों के साथ मीटिंग कर अभिभावकों को कॉलेज की सुविधाएं दिखाई गई। बताया गया कि पेरेंट्स बराबर संपर्क में रहें, ताकि वे मानसिक तनाव से दूर सकें। छात्र – छात्राऐं गलत संगत में पड़कर बुरी आदत नहीं अपनाएं।

 

व्हाइट कोट सेरेमनी के दौरान विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रिंयका गर्ग ने छात्र – छात्राओं को व्हाइट कोट सेरेमनी की शपथ भी दिलाई गई। जिसमें कहा गया कि इस व्हाइट कोट को पहनकर अपनी आखिरी सांस या धरती पर मौजूद पीड़ित मानवों की जिंदगी को बचाने की कोशिश करेंगे।

कार्यक्रम का सफल संचालन उप रजिस्ट्रार डॉक्टर उर्वशी मारवाह द्रारा किया गया साथ ही धन्यवाद ज्ञापित डॉक्टर विजय प्रसाद द्वारा किया गया। इस दौरान कॉलेज के समस्त वरिष्ठ सीनीयर, जूनियर डॉक्टर्स के साथ एमबीबीएस छात्र – छात्राओं के दूर दराज से आए परिजन उपस्थित हुए।