// राहुल अष्ठाना अजनबी //
अजनबी न्यूज ग्वालियर। कहते हैं कि पूत कपूत सुने हैं, पर माता न सुनी कुमाता… लेकिन ग्वालियर से आई एक खबर ने ममता के इस पावन शब्द को कलंकित कर दिया है। महज 5 साल के मासूम जतिन को क्या पता था कि जिस मां की गोद में वह सुकून ढूंढता था, वही हाथ उसे मौत की गहरी खाई में धकेल देंगे।

वह मनहूस शाम और मासूम की ‘गलती’
घटना 28 अप्रैल 2023 की है। थाटीपुर इलाके में रहने वाली ज्योति राठौर अपने प्रेमी उदय इंदौलिया के साथ घर की दूसरी मंजिल पर थी। खेलता हुआ मासूम जतिन वहां पहुंचा और उसने वह देख लिया जो शायद उसकी नन्हीं आंखों के लिए नहीं था। उसने अपनी मां को प्रेमी की बांहों में देख लिया।
बस यही मासूमियत जतिन की दुश्मन बन गई। अपनी करतूत और अवैध संबंधों के उजागर होने के डर से ज्योति के भीतर की ‘मां’ मर गई और एक ‘कातिल’ जाग उठा। उसने आव देखा न ताव, अपने ही कलेजे के टुकड़े को दो मंजिला छत से नीचे फेंक दिया।
हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या
शुरुआत में इसे एक आम दुर्घटना मानकर देखा जा रहा था, लेकिन पुलिस की पैनी नजर और सीसीटीवी फुटेज ने इस खौफनाक सच से पर्दा उठा दिया। पुलिस ने महज 15 दिनों में साबित कर दिया कि यह गिरना नहीं, बल्कि गिराया जाना था।

अदालत का फैसला: मां को उम्रकैद
शनिवार को अपर सत्र न्यायालय ने इस मार्मिक मामले पर अपना फैसला सुनाया। सीसीटीवी फुटेज और पुख्ता सबूतों के आधार पर न्यायालय ने ज्योति राठौर को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण उसके प्रेमी उदय इंदौलिया को दोषमुक्त कर दिया गया।
लोक अभियोजक विजय शर्मा के शब्द: “पुलिस की वैज्ञानिक जांच और परिस्थितियों ने साफ कर दिया कि मां ने ही अपने बच्चे की जान ली। यह समाज के लिए एक काला धब्बा है।”
एक मासूम की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि उसने अपनी मां के ‘राज’ को देख लिया था। आज जतिन तो नहीं है, लेकिन इंसाफ की मुहर ने यह साफ कर दिया है कि गुनाह की उम्र चाहे कितनी भी छोटी क्यों न हो, सजा पत्थर की लकीर होती है।


